चंडीगढ़। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें अमेरिका में अस्थायी वीजा या अवैध रूप से रह रहे माता-पिता के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत पहले की तरह जन्म से नागरिकता मिलती रहेगी। इस फैसले से अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीय परिवारों, विशेषकर पंजाब मूल के प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। प्रवासी संगठनों के अनुमान के अनुसार अमेरिका में हर वर्ष लगभग 8,000 पंजाबी मूल के बच्चों का जन्म होता है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की भी है जो वर्क वीजा, स्टूडेंट वीजा या अन्य वैध अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। अदालत के फैसले से इन बच्चों की नागरिकता को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन स्पष्ट रूप से यह अधिकार देता है कि अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा। अदालत ने 1898 के ऐतिहासिक यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क फैसले का भी हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक अधिकार को समाप्त नहीं कर सकते।
बर्थ टूरिज्म के खिलाफ कार्रवाई
हालांकि फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह तथाकथित ‘बर्थ टूरिज्म’ (सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाकर प्रसव कराने) के खिलाफ कार्रवाई और वीजा नियमों के सख्त अनुपालन पर जोर देगा। प्रवासी भारतीयों को राहत
पंजाब से बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय के लिए अमेरिका जाते हैं। ऐसे में यह फैसला प्रवासी भारतीय समुदाय, खासकर पंजाबी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका में वैध रूप से रह रहे भारतीय परिवारों को कानूनी स्पष्टता मिलेगी, जबकि भविष्य में नागरिकता संबंधी किसी बड़े बदलाव के लिए केवल राष्ट्रपति का आदेश पर्याप्त नहीं होगा और संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होगी।