Summer express, बठिंडा। बठिंडा में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नई तकनीकी समस्या खड़ी हो गई है। शहर में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें चलते-चलते ई-रिक्शा अचानक बंद हो गए। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात शरारती तत्व मोबाइल ऐप के जरिए स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम का दुरुपयोग कर वाहनों को लॉक कर रहे हैं। इस घटना ने न केवल ई-रिक्शा चालकों बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
देर रात रेलवे रोड स्थित अस्पताल बाजार के पास एक ई-रिक्शा चालक रेलवे स्टेशन से सवारी लेकर जा रहा था। स्टेशन से कुछ ही दूरी पर पहुंचते ही उसका ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया। वाहन चालू न होने के कारण यात्रियों को बीच रास्ते में उतरकर दूसरा वाहन लेना पड़ा, जबकि चालक करीब दो घंटे तक परेशान रहा।
इसी दौरान हनुमान चौक के पास भी एक अन्य ई-रिक्शा इसी तरह अचानक बंद होने की घटना सामने आई। दोनों मामलों में चालक काफी देर तक यह समझ नहीं पाए कि वाहन तकनीकी रूप से क्यों बंद हो गया।
घटना के दौरान वहां पहुंचे नौजवान वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने संबंधित मोबाइल ऐप के जरिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद ई-रिक्शा दोबारा चालू हो सका। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि शहर में इस तरह की यह पहली घटना है और यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
सोसायटी के प्रधान सोनू माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर गरीब ई-रिक्शा चालकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और साइबर एजेंसियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
कैसे बंद हो सकता है ई-रिक्शा?
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, कई आधुनिक ई-रिक्शा स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम और जीपीएस आधारित तकनीक से लैस होते हैं। इनमें वाहन का कंट्रोलर मोबाइल ऐप से जुड़ा होता है, जिससे बैटरी की स्थिति, लोकेशन और सुरक्षा संबंधी फीचर्स को नियंत्रित किया जा सकता है। चोरी की स्थिति में वाहन को लॉक करने की सुविधा भी इसी तकनीक का हिस्सा होती है।
यदि वाहन का डिफॉल्ट पासवर्ड नहीं बदला गया हो, सुरक्षा सेटिंग कमजोर हो या किसी अनधिकृत व्यक्ति को डिजिटल एक्सेस मिल जाए, तो वह ऐप के जरिए वाहन को लॉक कर सकता है। हालांकि यह सुविधा सुरक्षा के लिए बनाई गई है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी संभव है।
ई-रिक्शा चालक क्या रखें सावधानी?
विशेषज्ञों ने ई-रिक्शा मालिकों को सलाह दी है कि वे वाहन खरीदने के बाद तुरंत डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें, मोबाइल ऐप केवल अपने फोन में रखें और ओटीपी, यूजर आईडी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। साथ ही समय-समय पर ऐप और वाहन के सॉफ्टवेयर को अपडेट कराते रहें।
यदि वाहन अचानक डिजिटल लॉक हो जाए तो किसी अज्ञात व्यक्ति की सलाह पर ऐप डाउनलोड करने के बजाय अधिकृत डीलर, सर्विस सेंटर या निर्माता कंपनी से संपर्क करें और आवश्यकता होने पर पुलिस को भी सूचना दें।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं लागू करनी चाहिए। वहीं साइबर सेल और पुलिस को भी यह जांच करनी चाहिए कि कहीं कोई तकनीकी खामी का फायदा उठाकर ई-रिक्शा चालकों को निशाना तो नहीं बना रहा है।