Summer express/चम्बा, मंजूर पठान -:हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के सलूणी क्षेत्र की प्रसिद्ध सफेद मक्का को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। यह उपलब्धि न केवल स्थानीय किसानों के वर्षों के संरक्षण और मेहनत का सम्मान है, बल्कि पारंपरिक कृषि विरासत को भी नई पहचान दिलाने वाली है। जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और विशिष्ट गुणवत्ता से जुड़े होते हैं।
प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को इस बार जीआई टैग मिला है, जिनमें सलूणी की सफेद मक्का भी शामिल है। यह मक्का अपने अनोखे स्वाद, पौष्टिकता और पारंपरिक खेती के लिए जानी जाती है। स्थानीय किसान पीढ़ियों से इसकी खेती करते आ रहे हैं और बदलते समय के बावजूद इसकी मूल विशेषताओं को सुरक्षित रखा है। प्रशासन का कहना है कि इस मान्यता से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।सलूणी उपमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जाने वाली सफेद मक्का लंबे समय से स्थानीय लोगों की आजीविका और खान-पान का अहम हिस्सा रही है। जीआई टैग मिलने के बाद अब इस उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को आर्थिक रूप से भी लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रशासन के अनुसार इस उपलब्धि के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे, जो अब सफल हुए हैं। एसडीएम सलूणी चंद्रवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश के आठ उत्पादों को जीआई टैग मिलने से हिमाचल की पारंपरिक पहचान और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए संबंधित सभी लोगों को बधाई दी है। प्रशासन का मानना है कि इससे स्थानीय कृषि को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी और पारंपरिक फसलों के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।