Summer express/ऊना, राकेश -: पशु चिकित्सालय पॉलीक्लिनिक ललड़ी में पशु चिकित्सकों की विशेषज्ञ टीम ने एक जटिल शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए एक गंभीर रूप से बीमार भैंस को नया जीवन दिया। ऑपरेशन के दौरान भैंस के पेट से 32 नुकीली लोहे की कीलें, तार, एक बियरिंग बॉल, एक टूटा हुआ बोल्ट और 10 अन्य छोटे धातु के टुकड़े सुरक्षित निकाले गए। चिकित्सकों के अनुसार यदि समय रहते सर्जरी नहीं की जाती तो पशु की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
यह सफल शल्य चिकित्सा पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत राणौत के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन में डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा राणौत और डॉ. स्टेफनी प्रधान ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञ टीम के समन्वित प्रयासों से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा।डॉ. निशांत राणौत ने बताया कि मेहतपुर निवासी पशुपालक रामपाल अपनी भैंस को करीब 10 दिनों से चारा नहीं खाने की शिकायत के कारण पशु चिकित्सालय पॉलीक्लिनिक ललड़ी लेकर पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के बाद भैंस के रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड किए गए। जांच रिपोर्ट में पेट के भीतर धातु से बने विदेशी पदार्थ मौजूद होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद तत्काल शल्य चिकित्सा की सलाह दी गई।सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने भैंस के पेट से 32 नुकीली कीलें, लोहे के तार, एक बियरिंग बॉल, एक टूटा हुआ बोल्ट और 10 अन्य धातु के छोटे टुकड़े बाहर निकाले। चिकित्सकों ने बताया कि ये सभी धातु की वस्तुएं लंबे समय से भैंस के पेट में फंसी हुई थीं, जिसके कारण उसे लगातार दर्द हो रहा था और उसने चारा खाना भी लगभग बंद कर दिया था।
डॉ. राणौत ने बताया कि ऑपरेशन के बाद भैंस की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। उसे आवश्यक दवाइयां और उपचार दिया जा रहा है तथा अगले सात से दस दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा ताकि उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके।उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि पशुओं के चारे और उनके रहने के स्थान को हमेशा स्वच्छ रखें। लोहे की कीलें, तार और अन्य धातु की वस्तुएं चारे के संपर्क में नहीं आनी चाहिए, क्योंकि पशु इन्हें अनजाने में निगल लेते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी पशु में लंबे समय तक चारा न खाने, पेट दर्द या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय में जांच और उपचार कराना चाहिए।