Summer Express, खन्ना (लुधियाना) | पंजाब के लुधियाना जिले के खन्ना में गुरुवार को राज्यस्तरीय प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब अपनी मांगों को लेकर पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध के आवास की ओर बढ़ रहे मनरेगा कर्मचारियों और मजदूरों को पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश पर पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, फिर आंसू गैस के गोले दागे और बाद में लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए, जिनमें महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, पंजाब के विभिन्न जिलों से हजारों मनरेगा कर्मचारी और मजदूर खन्ना के प्रेम भंडारी पार्क में एकत्र हुए थे। सभा के दौरान कर्मचारियों ने स्थायी नियुक्ति, लंबे समय से लंबित वेतन के भुगतान और अन्य मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का फैसला लिया। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में अमलोह रोड स्थित पंचायत मंत्री के आवास की ओर रवाना हुए।
मंत्री आवास के बाहर पहले से थी सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मंत्री के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। रास्ते में बैरिकेडिंग की गई थी ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया तो पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और अंत में लाठीचार्ज किया गया। पुलिस कार्रवाई में कई कर्मचारी घायल हुए, जिन्हें मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया।
कर्मचारियों ने सरकार पर लगाए उपेक्षा के आरोप
मनरेगा कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे पिछले 18 वर्षों से ग्रामीण विकास कार्यों में योगदान दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कई महीनों से वेतन भी लंबित है, जिसके कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
घटना के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि अपनी मेहनत की कमाई और बकाया वेतन की मांग कर रहे श्रमिकों पर बल प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनहीनता करार दिया।
वहीं, पूर्व कैबिनेट मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली ने भी इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया और प्रदर्शन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं में भी बाधा डाली गई।
शिरोमणि अकाली दल के हलका प्रभारी यादविंदर सिंह यादू ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने सिविल अस्पताल पहुंचकर घायल कर्मचारियों से मुलाकात की और कहा कि आठ महीने से लंबित मजदूरी की मांग कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों का जल्द समाधान निकालने की अपील की।