Summer express/अंबाला-: हरियाणा की युवा नेत्री एवं टीम चित्रा की संस्थापक चित्रा सरवारा ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा-पत्र लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि देश का युवा अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहा है, तो सरकार को आत्ममंथन करते हुए उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।चित्रा सरवारा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वर्षों तक कठिन परिश्रम करने वाले छात्रों को बार-बार परीक्षा रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं में निराशा और मानसिक तनाव बढ़ा है, जो चिंता का विषय है।
चित्रा सरवारा ने जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे थे। उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करना और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना था। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को ऐसे आंदोलनों को संवेदनशीलता के साथ सुनना चाहिए।चित्रा सरवारा ने कहा कि आज का युवा बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और परीक्षा-पत्र लीक जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। लाखों परिवार अपने बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर वर्षों की कमाई खर्च करते हैं। ऐसे में जब किसी परीक्षा का पेपर लीक होता है या परीक्षा रद्द होती है, तो केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदें प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दोषियों पर कठोर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार होनी चाहिए। पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच के साथ पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
चित्रा सरवारा ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने, परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने तथा छात्रों के प्रतिनिधियों से सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यही देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला भी है।