एसएसपी गौरव सिंह की रणनीति से वित्तीय जांच के जरिए नशा तस्करों की आर्थिक रीढ़ पर सीधा वार
पुष्पेंद्र | शिमला
समर न्यूज
राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब नए स्तर पर पहुंच गई है। एसएसपी गौरव सिंह के नेतृत्व में शिमला पुलिस ने पहली बार केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी या मादक पदार्थों की बरामदगी तक कार्रवाई सीमित न रखकर उनके पूरे आर्थिक नेटवर्क को निशाना बनाया है।
वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में वित्तीय जांच के आधार पर नशा तस्करी से अर्जित 4.29 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। इसे नशा माफिया के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार माना जा रहा है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 में नशा तस्करी से अर्जित संपत्ति की कोई जब्ती नहीं हुई थी, जबकि 2026 में महज छह माह के भीतर 4.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर नया रिकॉर्ड बनाया गया। इससे साफ है कि पुलिस की रणनीति अब अपराधियों की आर्थिक ताकत खत्म करने पर केंद्रित है।
{वित्तीय जांच बनी सबसे बड़ा हथियार
पुलिस नशे से कमाए गए धन के निवेश, बैंक खातों, जमीन, मकानों, वाहनों और अन्य संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत जब्त किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़े बिना नशे के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। शिमला पुलिस ने साफ कर दिया है कि अब नशा तस्करों के लिए केवल गिरफ्तारी से बचना पर्याप्त नहीं होगा। अवैध कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियां भी कानून के दायरे में आएंगी। आने वाले समय में वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई को और तेज कर नशे के पूरे आर्थिक तंत्र पर निर्णायक प्रहार किया जाएगा।
हिमाचल पुलिस का कहना है िक नशा तस्करों पर ऐसी कड़ी कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा।