एजेंसी | नई दिल्ली/चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं।
इसकी वजह शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की शुक्रवार को संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात बनी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
हालांकि बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के एजेंडे का औपचारिक विवरण जारी नहीं किया गया। राजनीतिक हलकों में इसे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का लगभग ढाई दशक पुराना गठबंधन वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। इसके बाद दोनों दल 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े थे। सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में दोनों दलों के बीच संवाद बढ़ने के संकेत लगातार मिल रहे थे। इससे पहले भी सुखबीर बादल गठबंधन संबंधी सवालों पर सीधे जवाब देने से बचते रहे थे और कहते रहे थे कि फिलहाल उनका ध्यान पार्टी संगठन को मजबूत करने पर है। दूसरी ओर भाजपा के कई नेता समय-समय पर यह कहते रहे हैं कि पार्टी पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है।
ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे: केजरीवाल
बैठक के बाद आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा पर कटाक्ष करते हुए फिल्मी गीत की पंक्ति, “ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे” लिखी। इसे दोनों दलों के संभावित राजनीतिक समीकरण पर तंज के रूप में देखा जा रहा है। पंजाब की सियासत में बयानबाजी और तेज हो गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों दलों के बीच गठबंधन पर सहमति बनती है तो यह पंजाब के चुनावी मुकाबले को नया आयाम दे सकता है। अभी तक न तो भाजपा और न ही शिरोमणि अकाली दल ने औपचारिक रूप से किसी चुनावी समझौते की घोषणा की है। दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि राजनीतिक निर्णय उचित समय पर सार्वजनिक किए जाएंगे।
गठबंधन पर बना हुआ है सस्पेंस
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की ओर से अभी गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दोनों दलों की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजरें टिकी हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
पंजाब की राजनीित में बढ़ी हलचल
इस मुलाकात ने पंजाब के राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। विपक्ष इसे संभावित चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहा है, जबकि दोनों दलों ने फिलहाल किसी भी अटकल पर आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनी रहेगी।