Facebook-f Youtube Summer Express - Header One X-twitter

55 साल का इंतजार खत्म कब? पौंग बांध विस्थापितों ने उठाई आरक्षित जमीन वापस दिलाने की मांग

Summer express/नूरपुर, संजीव-:देश के विकास की कीमत अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुकाई, तो उनमें पौंग बांध विस्थापित परिवार भी शामिल हैं। बिजली उत्पादन हुआ, राजस्थान के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा और विकास की तस्वीर बदली, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी जमीन, घर और गांव तक छोड़ दिए, उनका संघर्ष आज भी खत्म नहीं हुआ है। विस्थापितों का आरोप है कि 55 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें उनके अधिकार की जमीन नहीं मिल पाई है। फतेहपुर की उपतहसील राजा का तालाब में आयोजित प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक में विस्थापितों ने एक बार फिर सरकार से आरक्षित भूमि पर अपना हक दिलाने और कथित कब्जों को हटाने की मांग उठाई।

राजा का तालाब में हुई प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा राजस्थान के श्रीगंगानगर में पौंग बांध विस्थापितों के लिए आरक्षित भूमि का रहा। समिति का दावा है कि करीब 2 लाख 25 हजार एकड़ भूमि विस्थापितों के लिए आरक्षित की गई थी, लेकिन इसमें से 1188 मुरब्बों पर कथित तौर पर भू-माफिया ने कब्जा कर रखा है। विस्थापितों ने सवाल उठाया कि जब भूमि उनके पुनर्वास के लिए निर्धारित है, तो फिर दूसरे लोगों का उस पर कब्जा कैसे हो गया।वक्ताओं ने कहा कि पांच दशक से ज्यादा समय गुजर चुका है, लेकिन हर सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि सरकारी स्तर पर फाइलें चलती रहीं, समितियां बनती रहीं और आश्वासन मिलते रहे, लेकिन जमीन का वास्तविक अधिकार आज भी हजारों परिवारों को नहीं मिला।

“हम किसी की जमीन नहीं मांग रहे हैं, हम अपना हक मांग रहे हैं। सरकार स्पष्ट करे कि हमारे लिए आरक्षित जमीन कहां है और उस पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अब विस्थापित परिवार सिर्फ आश्वासन के भरोसे नहीं बैठेंगे।”

बैठक में केंद्र और राजस्थान सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। विस्थापितों ने कहा कि बांध निर्माण के समय देशहित को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन, घर और पुश्तैनी गांव छोड़ दिए थे। कई परिवारों के सामने नई जगह पर बसने और आजीविका शुरू करने की चुनौती थी। उनका कहना है कि समय बीतने के साथ कई बुजुर्ग अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया से चले गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।विस्थापितों ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान उनके मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है और समाधान के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी समस्याएं फिर पीछे छूट जाती हैं। समिति ने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकार और सम्मान के लिए है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। समिति का कहना है कि विस्थापितों को ऐसी जमीन नहीं चाहिए, जहां उनके लिए दोबारा नई परेशानियां खड़ी हों। उनकी मांग है कि श्रीगंगानगर में उनके नाम पर आरक्षित भूमि का रिकॉर्ड स्पष्ट किया जाए और पात्र विस्थापितों को उनका अधिकार दिलाया जाए।विस्थापितों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि 55 साल का इंतजार अब काफी लंबा हो चुका है और आने वाली पीढ़ी को भी इस संघर्ष में झोंकना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मनोहर लाल विश्वकर्मा, पौंग बांध विस्थापित:

“हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या सरकार से नहीं, अन्याय के खिलाफ है। हमने देश के लिए अपना सब कुछ छोड़ा। अब सरकार हमारी आरक्षित जमीन हमें दिलाए। जब तक हर पात्र विस्थापित को उसका अधिकार नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

पौंग बांध ने देश को बिजली दी, राजस्थान के खेतों को पानी दिया और विकास की नई कहानी लिखी। लेकिन इस विकास की कीमत चुकाने वाले हजारों परिवार आज भी अपने हक की जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राजा का तालाब की बैठक से उठी आवाज अब एक बार फिर सरकार के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—क्या 55 साल बाद पौंग बांध विस्थापितों को उनका अधिकार मिलेगा, या उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के इंतजार में संघर्ष करती रहेगी?

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

55 साल का इंतजार खत्म कब? पौंग बांध विस्थापितों ने उठाई आरक्षित जमीन वापस दिलाने की मांग

Summer express/नूरपुर, संजीव-:देश के विकास की कीमत अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुकाई, तो उनमें पौंग बांध विस्थापित परिवार भी शामिल हैं। बिजली उत्पादन हुआ, राजस्थान के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचा और विकास की तस्वीर बदली, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी जमीन, घर और गांव तक छोड़ दिए, उनका संघर्ष आज भी खत्म...

शिमला में भाजपा की तिरंगा यात्रा, जयराम ठाकुर और सुरेश कश्यप ने दिया ‘हर घर तिरंगा’ का संदेश

संसद में जारी गतिरोध पर कांग्रेस पर बरसे सुरेश कश्यप, बोले- जनता की गाढ़ी कमाई का हो रहा नुकस Summer express/शिमला, संजू-:स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को शिमला में तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा सांसद सुरेश...

मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के प्रबंधन को लेकर SGPC-HSGPC में फिर बढ़ा तनाव, भारी पुलिस बल तैनात

Summer express, कुरुक्षेत्र। शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। शनिवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGPC) के आमने-सामने आने की आशंका के चलते प्रशासन अलर्ट मोड पर है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए...

इनेलो 9 अगस्त से हरियाणा में शुरू करेगा जनजागरण अभियान, भाजपा सरकार पर साधा निशाना

Summer express, बलिंदर कुमार , हरियाणा। भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (इनेलो) भाजपा सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रदेश में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर 9 अगस्त से पूरे हरियाणा में प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करने जा रहा है। पार्टी का दावा है कि अभियान के दौरान आम लोगों से सीधे संवाद कर सरकार की नीतियों...

फरीदाबाद में भारी बारिश से अंडरपास जलमग्न: पानी में डूबी स्कॉर्पियो,  चालक ने बचाई जान

Summer express, फरीदाबाद । फरीदाबाद में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। ओल्ड अंडरपास और ग्रीनफील्ड अंडरपास समेत कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का...
Summer Express - header one

हम लाते हैं तेज़, साफ़ और भरोसेमंद ख़बरें — शोर के बीच भी सच्चाई तक पहुंचाने वाली।
चाहे ब्रेकिंग न्यूज़ हो या आपके लिए अहम कहानियाँ, हर दिन हम देते हैं समझदारी और रोचक अंदाज़ में कवरेज।

Must Read

©2025- All Right Reserved.