Summer express/सोनीपत /रमेश कुमार-:सोनीपत में शिवचरण राम रतन गुप्ता की 13वीं की रस्म आज गीता मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूरी की गई। इस कार्यक्रम में उनकी बेटियां और परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। इससे पहले दाह संस्कार के दौरान बेटियों से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई थी और अस्थि विसर्जन के समय भी व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क किया गया था, लेकिन अंतिम रस्मों में वे प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हुईं। वृद्ध आश्रम संचालक और सोनीपत की सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर 13वीं की क्रिया पूरी की।
सोनीपत के गीता मंदिर में हवन-यज्ञ के साथ शिवचरण गुप्ता की 13वीं का कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। परिवार की ओर से कोई सदस्य मौजूद नहीं रहा, जबकि सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और कई स्थानीय नेता कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान प्रसाद भी तैयार करवाया गया और उपस्थित लोगों में वितरित किया गया।वृद्ध आश्रम संचालक आनंद कुमार ने बताया कि हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सभी अंतिम क्रियाएं पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिवचरण गुप्ता की बेटियों ने पहले ही 13वीं में शामिल होने से मना कर दिया था। आनंद कुमार ने कहा कि समाज में बुजुर्गों की देखभाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके अनुसार, एक ओर कुछ परिवार अपने बुजुर्गों को वापस लेने वृद्ध आश्रम पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में फोन ऐसे भी आ रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग अपने बच्चों द्वारा परेशान किए जाने की बात बताते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों में माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा की भावना बचपन से विकसित करने की जरूरत है। परिवार में अच्छे संस्कार होंगे तो ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है।
13वीं के कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग भी पहुंचे। समाजसेविका सुमन मंजरी ने कहा कि मौजूदा समय में संस्कारों की कमी समाज के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि शिवचरण राम रतन गुप्ता का मामला लोगों को बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी और परिवार के संस्कारों पर सोचने के लिए प्रेरित कर रहा है।उन्होंने कहा कि माता-पिता ने जिस तरह बच्चों का पालन-पोषण किया, उसी तरह बच्चों की भी जिम्मेदारी है कि वे उम्रदराज होने पर अपने माता-पिता का सहारा बनें। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने और बच्चों को बचपन से ही बुजुर्गों के सम्मान की शिक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।