Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के पावन अवसर पर अंबाला छावनी के प्राचीन हाथी खाना कैलाश मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी कारण सावन के सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। अंबाला छावनी के कैलाश मंदिर में भी तीसरे सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। नाग पंचमी का पर्व भी इसी दिन होने के कारण मंदिर में धार्मिक उत्साह और बढ़ गया।
मंदिर के पुजारी महंत मनमोहन दास ने बताया कि कैलाश मंदिर करीब 1844 में स्थापित हुआ था। सावन के दौरान यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं।
श्रद्धालुओं के अनुसार कैलाश मंदिर काफी प्राचीन और आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, पुराने समय में इस स्थान पर हाथी बांधे जाते थे, जिसके कारण इसे हाथी खाना के नाम से जाना जाता था। बाद में यहां मंदिर की स्थापना हुई। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे वर्षों से मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंच रहे हैं और उनकी भगवान शिव में गहरी आस्था है।
भक्तों ने बताया कि वे सामान्य तौर पर प्रत्येक सोमवार को मंदिर में दर्शन करने आते हैं, लेकिन सावन के महीने में शिव आराधना का विशेष महत्व होने के कारण पूरे महीने मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग के चलते मंदिर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही और पूरा परिसर भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता रहा।