Summer express/चिंतपूर्णी,विकास-:चिंतपूर्णी श्रावण अष्टमी मेले के पवित्र अवसर पर मां चिंतपूर्णी के दरबार में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति के कई भावुक दृश्य देखने को मिल रहे हैं। मेले के छठे दिन पंजाब के लुधियाना से आए श्रद्धालु रणजीत सिंह ने अपनी अनोखी श्रद्धा से सभी का ध्यान आकर्षित किया। मनोकामना पूरी होने पर वह करीब दो किलोमीटर की दूरी घुटनों के बल रेंगते हुए और दोनों हाथों में पावन ज्योति लेकर माता के दरबार पहुंचे।
रणजीत सिंह ने बताया कि उनकी मां चिंतपूर्णी के प्रति गहरी आस्था है। उन्होंने मनोकामना पूरी होने के बाद माता रानी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने कठिन यात्रा का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए केवल यात्रा नहीं, बल्कि माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने कभी इस तरह घुटनों के बल रेंगकर या दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा नहीं की थी। कठिन रास्ते और शारीरिक परेशानी के बावजूद उनके कदम नहीं रुके। दोनों हाथों में ज्योति लेकर उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर की ओर प्रस्थान किया।उनकी इस अनोखी भक्ति को देखकर रास्ते में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कई लोगों ने उनकी आस्था की सराहना की और उनका उत्साह बढ़ाया। जैसे ही वह माता के दरबार के समीप पहुंचे, पूरा वातावरण ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा।श्रावण अष्टमी मेले में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच रणजीत सिंह की यह यात्रा आस्था, विश्वास और संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई। उनकी भक्ति ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।