Summer express/शिमला/संजू-:शिमला में केंद्र और राज्य सरकार समेत बैंक तथा एलआईसी के पेंशनरों ने फाइनेंस बिल अमेंडमेंट के विरोध में बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। पेंशनरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और पेंशन से जुड़े अधिकारों को बहाल करने की मांग उठाई।ऑल इंडिया एनसीसीपीए ऑडिट एंड अकाउंट पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव जगमोहन ठाकुर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से 29 मार्च को संसद में पारित फाइनेंस बिल अमेंडमेंट के जरिए पेंशनरों का वर्गीकरण किया गया है। उनके मुताबिक जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया गया है।
जगमोहन ठाकुर का कहना है कि इस संशोधन का सबसे अधिक असर जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि नए प्रावधानों के तहत ऐसे पेंशनरों के पेंशन संशोधन का रास्ता बंद हो जाएगा और उन्हें केवल महंगाई राहत यानी डीआर का लाभ मिलेगा।पेंशनर नेता ने आरोप लगाया कि यह संशोधन 1972 के पेंशन नियमों को कमजोर करने वाला और पेंशनर विरोधी कदम है। उन्होंने कहा कि पेंशन सरकार की ओर से दी जाने वाली कोई खैरात नहीं, बल्कि वर्षों तक की गई सेवा के बदले मिलने वाला कानूनी अधिकार है।उन्होंने वर्ष 1983 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक डीएस नकारा फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में पेंशनरों को समान दृष्टि से देखने के सिद्धांत को मजबूती मिली थी। उनका आरोप है कि मौजूदा संशोधन से पेंशनरों के पेंशन संशोधन के अधिकार पर असर पड़ रहा है।
जगमोहन ठाकुर ने बताया कि संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है और मामले की सुनवाई 25 अगस्त को प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि पेंशनर यह लड़ाई सड़कों से लेकर अदालत तक जारी रखेंगे।आंदोलन की आगामी रणनीति भी घोषित की गई। बुधवार को देशभर में कॉल अटेंशन डे मनाकर विभागाध्यक्षों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं। इसके बाद 17, 18 और 19 सितंबर को शिमला में केंद्र, राज्य, बैंक और एलआईसी के पेंशनर तीन दिवसीय धरना देंगे। आंदोलन के अंतिम चरण में 25 नवंबर को देशभर के पेंशनर दिल्ली में संसद मार्च करेंगे।पेंशनरों ने केंद्र सरकार से फाइनेंस बिल अमेंडमेंट पर पुनर्विचार करने और उनके पेंशन संबंधी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।