Summer express , अंकुर कपूर, अंबाला। सावन माह के आखिरी सोमवार को लेकर अंबाला छावनी में शिव भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही प्राचीन हाथी खाना कैलाश मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। भक्तों ने शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।
सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। कई भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व है।
अंबाला छावनी स्थित हाथी खाना कैलाश मंदिर को बेहद प्राचीन शिव मंदिर माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का निर्माण करीब वर्ष 1844 में हुआ था। मान्यता है कि पहले यहां हाथी बांधे जाते थे, जिसके बाद समय के साथ यह स्थान प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हुआ। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
शिव भक्तों के लिए सावन में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व रहता है। श्रद्धालु हरिद्वार समेत विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर आते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद भी कई श्रद्धालु पूरे सावन नियमित रूप से मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ भक्त सावन के साथ भाद्रपद के दिनों को जोड़कर लगातार करीब 40 दिन तक शिवालयों में दर्शन और जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे कई वर्षों से हाथी खाना कैलाश मंदिर में पूजा करने आ रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर के प्रति लोगों में गहरी आस्था है और यहां भगवान शिव से मांगी गई मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। सावन के अंतिम सोमवार पर भी भक्तों ने श्रद्धा के साथ महादेव का जलाभिषेक कर आशीर्वाद मांगा।