Summer express/बिलासपुर, सुभाष -:हिमाचल प्रदेश में दो माह के मौसमी मत्स्य आखेट प्रतिबंध के बाद जलाशयों में मछलियों की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 15 अगस्त को प्रतिबंध हटने के बाद पहले सप्ताह में प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशयों से 110 मीट्रिक टन से अधिक मछली पकड़ी गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 75 मीट्रिक टन मत्स्य पकड़ दर्ज हुई थी। इस तरह इस वर्ष पकड़ में 35 मीट्रिक टन से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग 46.67 प्रतिशत अधिक है।मत्स्य विभाग के निदेशक ओम कांत ठाकुर ने बताया कि प्रतिबंध हटने के पहले ही दिन करीब 46 मीट्रिक टन मछली की पकड़ दर्ज की गई। 23 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार पोंग डैम में करीब 51 मीट्रिक टन और गोविंद सागर में 50 मीट्रिक टन से अधिक मछली पकड़ी गई। रंजीत सागर में लगभग 7.5 मीट्रिक टन, जबकि चमेरा और कोल डैम में संयुक्त रूप से करीब एक मीट्रिक टन मत्स्य पकड़ दर्ज हुई।
प्रजातियों की बात करें तो सिंघाड़ा करीब 35 मीट्रिक टन और सिल्वर कार्प 34 मीट्रिक टन के साथ सबसे अधिक पकड़ी गईं। रोहू की पकड़ करीब 12 मीट्रिक टन, कॉमन कार्प 10 मीट्रिक टन, मिरर कार्प व महाशीर लगभग 5 मीट्रिक टन रही। कतला की पकड़ चार मीट्रिक टन से अधिक, अन्य प्रजातियों की करीब तीन मीट्रिक टन, मृगल की दो मीट्रिक टन से अधिक और कलबासु की करीब 1.5 मीट्रिक टन रही।ठाकुर के अनुसार मत्स्य संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष प्रदेश के जलाशयों में करीब एक करोड़ मत्स्य बीज डाले गए हैं। इसके अलावा विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। लैंडिंग सेंटरों से प्राप्त आंकड़ों को ऑनलाइन एक्सेल आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे प्रतिदिन जलाशय और प्रजाति के अनुसार मत्स्य पकड़ का रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है।विभाग के मुताबिक इस वर्ष जलाशयों में बेहतर जलस्तर से भी मछलियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। बेहतर जलस्तर, मत्स्य बीज संचयन और प्रभावी निगरानी को बढ़ी हुई मत्स्य पकड़ के प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। विभाग आगामी दिनों में भी मत्स्य संसाधनों और पकड़ की लगातार निगरानी करेगा।