Summer express राहुल चावला/ मैक्लोडगंज-:मैक्लोडगंज स्थित तिब्बती सेटेलमेंट कार्यालय में मंगलवार को ‘एशिया का जल टावर संकट में : तिब्बत-नेपाल फ्लैश फ्लड में पारदर्शिता की मांग’ विषय पर प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई। अंतरराष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क और स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत-इंडिया की ओर से आयोजित इस ब्रीफिंग में तिब्बत और नेपाल में हाल में आई फ्लैश फ्लड से हुए जान-माल के नुकसान और इसके संभावित पर्यावरणीय कारणों पर चर्चा की गई।प्रेस ब्रीफिंग में वक्ताओं ने चीन की ओर से बाढ़ से संबंधित आंकड़ों और प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि बाढ़ में हुई मौतों, प्रभावित गांवों और संपत्ति को हुए नुकसान की पूरी एवं स्पष्ट जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। उन्होंने तिब्बत में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों, जल संसाधनों के दोहन और पर्यावरणीय बदलावों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।
तिब्बत नीति संस्थान के पर्यावरण एवं विकास विभाग की शोधकर्ता धोंडुप ने कहा कि तिब्बत में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हो रहा बुनियादी ढांचे का विकास वहां के नाजुक पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत को एशिया का ‘वॉटर टावर’ माना जाता है और यहां से निकलने वाली कई प्रमुख नदियां भारत समेत एशिया के बड़े हिस्से की जल व्यवस्था से जुड़ी हैं।धोंडुप के अनुसार, तिब्बत में प्राकृतिक संसाधनों और नदी तंत्र में होने वाले बदलावों का असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पड़ोसी देशों और करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में बाढ़ और पर्यावरणीय घटनाओं से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करना बेहद जरूरी है।प्रेस ब्रीफिंग में चीन से फ्लैश फ्लड में हुई मौतों, प्रभावित क्षेत्रों, विस्थापित लोगों और आर्थिक नुकसान की सटीक, विस्तृत और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई। वक्ताओं ने क्षेत्रीय जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक निगरानी और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।