Summer express ,धर्मवीर, मंडी। बीबीएमबी की ओर से पंडोह डैम के पास प्रस्तावित 10 मेगावॉट के पावर प्रोजेक्ट को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने सशर्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया है। सरकार ने परियोजना के निर्माण को मंजूरी देते हुए बीबीएमबी प्रबंधन के सामने सरप्लस लैंड वापस करने की शर्त रखी है। अब इस मुद्दे को लेकर बीबीएमबी और प्रदेश सरकार के बीच बातचीत चल रही है।
बीबीएमबी पंडोह के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणी शर्मा ने एनओसी जारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने अतिरिक्त भूमि वापस करने की शर्त के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। बीबीएमबी प्रबंधन का कहना है कि उसके पास फिलहाल कोई सरप्लस लैंड उपलब्ध नहीं है और जो अतिरिक्त भूमि थी, उसे पहले ही प्रदेश सरकार को वापस किया जा चुका है। इस मामले में बीबीएमबी के उच्चाधिकारी सरकार के साथ वार्ता कर रहे हैं।
पंडोह डैम के पास पुरानी डायवर्सन टनल के जरिए बिजली उत्पादन की योजना बनाई गई है। करीब 50 वर्ष पहले डैम के निर्माण के दौरान ब्यास नदी के पानी को डायवर्ट करने के लिए लगभग 30 मीटर व्यास की टनल बनाई गई थी। बीबीएमबी ने अध्ययन के दौरान पाया कि डैम से छोड़े जाने वाले करीब 15 प्रतिशत पानी को इस टनल के माध्यम से प्रवाहित कर बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
इसी संभावना को देखते हुए बीबीएमबी ने यहां 5-5 मेगावॉट क्षमता के दो पावर प्रोजेक्ट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। दोनों परियोजनाओं की कुल क्षमता 10 मेगावॉट होगी। बीबीएमबी के अनुसार, परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) में करीब 80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आंकी गई है। फिलहाल इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
परियोजना के शुरू होने से बिजली उत्पादन के साथ हिमाचल प्रदेश को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हिस्सेदारी के तहत प्रदेश को परियोजना से मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। बीबीएमबी का कहना है कि इस परियोजना से उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए अतिरिक्त बिजली उत्पादन किया जा सकेगा।