Summer express/हमीरपुर, अरविंद-: पंचायत समिति बमसन टौणी देवी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार सियासी तस्वीर कुछ अलग नजर आई। यहां मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े दो प्रत्याशियों के बीच हुआ। 15 वार्डों वाली पंचायत समिति में कांग्रेस अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार सकी, जबकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों के लिए भाजपा समर्थित दावेदार आमने-सामने रहे।एसडीएम हमीरपुर संजीत सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार सुबह 11 बजे चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। दोनों पदों पर सर्वसम्मति नहीं बन पाने के बाद मतदान करवाया गया। अध्यक्ष पद के लिए जंदड़ू वार्ड से पूजा कुमारी और पौहंज वार्ड से सुषमा देवी के बीच सीधा मुकाबला हुआ। मतदान में पूजा कुमारी को 10 और सुषमा देवी को 5 मत मिले। इस तरह पूजा कुमारी ने पांच मतों के अंतर से जीत दर्ज कर अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
उपाध्यक्ष पद के लिए पटनौण वार्ड के सुरेंद्र सिंह और बगवाड़ा वार्ड के विपिन कुमार के बीच मुकाबला हुआ। सुरेंद्र सिंह को 10 मत मिले, जबकि विपिन कुमार के खाते में 5 मत आए। पांच मतों के अंतर से जीत हासिल कर सुरेंद्र सिंह उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।जीत के बाद अध्यक्ष पूजा कुमारी ने कहा कि वह नई जिम्मेदारी को पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ निभाएंगी। उन्होंने बमसन टौणी देवी क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही और पंचायत समिति सदस्यों सहित भाजपा नेतृत्व का आभार जताया।उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने अपनी जीत का श्रेय प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रवेश कुमार, हमीरपुर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को साथ लेकर क्षेत्र के विकास के लिए काम किया जाएगा।चुनाव परिणाम ने स्थानीय राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस का प्रत्याशी न उतारना जहां पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं भाजपा से जुड़े दो प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला स्थानीय स्तर पर शक्ति संतुलन और राजनीतिक खींचतान की ओर भी इशारा कर रहा है।
परिणाम घोषित होने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने पूजा कुमारी और सुरेंद्र सिंह को बधाई दी।कांग्रेस विधायक रणजीत राणा भी दोनों नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते नजर आए।अब राजनीतिक हलकों में चर्चा यही है कि कांग्रेस ने मैदान से दूरी क्यों बनाई और भाजपा के भीतर हुआ यह मुकाबला महज चुनावी प्रतिस्पर्धा था या इसके पीछे स्थानीय स्तर की कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही थी।