summer express , बलिंदर कुमार .कैथल। आधुनिक शिक्षा, तकनीक और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में युवा पीढ़ी के सामने अवसरों के साथ कई सामाजिक और मानसिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में युवाओं को शिक्षा और रोजगार के साथ संस्कार, अध्यात्म, आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यह बात कथा वाचक एवं आध्यात्मिक वक्ता महंत रमन पुरी महाराज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
महंत रमन पुरी महाराज ने कहा कि आज का युवा नई तकनीक और आधुनिक शिक्षा के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन तनाव, नकारात्मक संगति, नशे की प्रवृत्ति, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और जीवन में सही दिशा चुनने जैसी चुनौतियां भी उसके सामने हैं। ऐसे माहौल में केवल आधुनिक शिक्षा और रोजगार के लिए युवाओं को तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कथा वाचकों और आध्यात्मिक वक्ताओं की भूमिका केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें समाज में हो रहे बदलावों और विशेषकर युवा पीढ़ी के सामने मौजूद समस्याओं पर भी सार्थक संवाद करना चाहिए। आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
महंत रमन पुरी महाराज ने कहा कि अध्यात्म का अर्थ जीवन से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को जीवन में सही दिशा चुनने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देता है। युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और सेवा की भावना विकसित करने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को भी मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।