Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि परिवीक्षा अवधि में सेवा समाप्त होने के बावजूद कर्मचारी को हर मामले में अपील के वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सेवा समाप्ति से कर्मचारी की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो पंजाब सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 1970 के तहत अपील का रास्ता उपलब्ध हो सकता है।
जस्टिस कुलदीप तिवारी ने यह आदेश जसपाल सिंह की याचिका पर एक सितंबर 2026 को सुनाया। याचिकाकर्ता की सेवाएं 22 जुलाई 2026 के आदेश से समाप्त की गई थीं। उस समय वह परिवीक्षा अवधि में कार्यरत था। विभाग ने नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या सात का हवाला दिया था। इसमें कहा गया था कि चरित्र और पूर्ववृत्त का सत्यापन संबंधित मजिस्ट्रेट से होने के बाद ही पूरा माना जाएगा और सत्यापन के दौरान चरित्र संबंधी कोई शिकायत सामने आने पर बिना नोटिस सेवा समाप्त की जा सकती है। अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट हुआ कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर सेवा समाप्त की गई थी।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि परिवीक्षा अवधि में की गई सामान्य सेवा समाप्ति के खिलाफ 1970 के नियमों के तहत अपील का प्रावधान लागू नहीं होता। वहीं पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि नियम तीन के तहत एक महीने से कम नोटिस पर सेवा से हटाए जाने वाले कर्मचारी इन नियमों के दायरे में नहीं आते। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि परिवीक्षा अवधि में सेवा समाप्ति को दंड नहीं माना जा सकता, इसलिए कर्मचारी को अपील का अधिकार नहीं है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि नियम 14 में उन आदेशों का उल्लेख है जिनके खिलाफ अपील नहीं की जा सकती, जबकि नियम 15 में अपील योग्य आदेशों की श्रेणियां दी गई हैं। नियम 15 के तहत ऐसा आदेश भी अपील के दायरे में आता है, जिससे कर्मचारी के वेतन, भत्ते, पेंशन या सेवा की अन्य शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अदालत ने माना कि सेवा समाप्ति से कर्मचारी का रोजगार पूरी तरह खत्म हो जाता है और उसकी सेवा शर्तों पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए इसे नियम 15(4)(ए) के दायरे में माना जा सकता है।
अदालत ने नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या 14 को भी महत्वपूर्ण माना। इसमें स्पष्ट रूप से पंजाब सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 1970 समेत संबंधित सेवा नियमों को कर्मचारी पर लागू बताया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति की शर्तों में ही इन नियमों को शामिल कर दिया गया है तो सामान्य अपवर्जन के आधार पर कर्मचारी को इनके लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने कहा कि नियमों की व्याख्या ऐसी होनी चाहिए जिससे कर्मचारी पूरी तरह उपचाराधीन न रह जाए और उसे प्रभावी वैधानिक उपाय मिल सके। अदालत ने याचिकाकर्ता को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिन के भीतर अपील दायर करने की छूट दी है। अपीलीय प्राधिकारी को अपील पर चार महीने के भीतर गुण-दोष के आधार पर निर्णय करना होगा और कर्मचारी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को सुनवाई का उचित अवसर देना होगा। याचिका इसी निर्देश के साथ निपटा दी गई