Summer express/कसौली -: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा मंगलवार शाम कसौली पहुंचे। बुधवार को उन्होंने अपनी दादी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता को केवल एक शब्द में परिभाषित नहीं किया जा सकता। ऐसे मंचों पर दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है और विभिन्न देशों के नेता एक साथ बैठकर साझा विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं।
‘ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच है ब्रिक्स’
आनंद शर्मा ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई प्रमुख देश इस मंच पर आपस में संवाद करते हैं। अलग-अलग मुद्दों और परिस्थितियों के बीच बातचीत के जरिए साझा सहमति बनाने का प्रयास महत्वपूर्ण है।
बिना विवाद के घोषणा सामने आना महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में बिना किसी विवाद के एक घोषणा सामने आई। इस संदर्भ में उन्होंने भारत की भूमिका और उसके अंतरराष्ट्रीय महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का अपना एक कद है और ब्रिक्स जैसे मंच पर भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण है।मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव है और कई जगह युद्ध चल रहे हैं। ऐसे समय में विभिन्न देशों के बीच बातचीत, सामूहिक निर्णय लेने और आम सहमति बनाने के प्रयासों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर सर्वसम्मति संभव नहीं होती, लेकिन सहमति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण कदम है।
शुरुआती ब्रिक्स सम्मेलनों में शामिल रहे आनंद शर्मा
ब्रिक्स के इतिहास का उल्लेख करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि इसकी शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पहली ब्रिक्स समिट में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें शुरुआती पांच ब्रिक्स सम्मेलनों में शामिल होने का अवसर मिला और वर्ष 2013 का सम्मेलन उनके लिए आखिरी था।
कसौली से पुराना पारिवारिक जुड़ाव
आनंद शर्मा ने कसौली से अपने पुराने पारिवारिक संबंधों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब भी वह कसौली आते हैं तो गढ़खल में रुकते हैं। उनके दादा-दादी यहीं रहते थे और उनके बचपन का काफी समय इसी क्षेत्र में बीता है। उन्होंने कहा कि कसौली और यहां के लोगों से उनका विशेष लगाव है तथा यहां मिलने वाला प्यार, स्नेह और सम्मान आज भी उनके लिए खास है।
दादी की समाधि पर श्रद्धांजलि के बाद शिमला रवाना
आनंद शर्मा ने कहा कि हिमाचल से उनका पुराना संबंध है। उनका जन्म शिमला में हुआ और उनके पूर्वजों तथा बचपन की यादों का जुड़ाव भी इस क्षेत्र से रहा है। दादी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वह शिमला के लिए रवाना हो गए।