Summer express/शिमला,संजू-:किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गई है। दिल्ली में छह राज्यों के बीच परियोजना को लेकर हुए समझौते के बाद जहां भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर श्रेय लेने का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस ने इसे हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुशांत कपरेट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को परियोजना को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाला बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल के अधिकारों और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए मजबूती से पैरवी की है।कपरेट ने कहा कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ परियोजना लंबे समय से लंबित रही है। उनके अनुसार परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1985 में तैयार हुई थी, लेकिन करीब चार दशक बाद वर्ष 2026 में इसका एमओयू हो पाया है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के प्रयासों से परियोजना को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया गया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि करीब 15,624 करोड़ रुपये की इस परियोजना से कई राज्यों को पेयजल और बिजली की सुविधा मिलेगी। साथ ही हिमाचल और उत्तराखंड में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि परियोजना से तैयार होने वाली बिजली उत्तरी भारत के बढ़ते ऊर्जा संकट को पूरा करने में भी मददगार होगी।कपरेट ने कहा कि परियोजना के जल स्रोत हिमाचल प्रदेश में हैं, इसलिए राज्य को उसके संसाधनों का उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने एमओयू के दौरान हिमाचल के अधिकारों और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उनके मुताबिक इससे प्रदेश को लंबे समय में आर्थिक लाभ मिल सकता है।भाजपा पर निशाना साधते हुए कपरेट ने सवाल उठाया कि यदि किशाऊ परियोजना इतनी महत्वपूर्ण थी तो पूर्व की भाजपा सरकारों के कार्यकाल में इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि परियोजना दशकों से लंबित थी और अब समझौता होने के बाद विपक्ष को इसका विरोध करने के बजाय तथ्य सामने रखने चाहिए।कपरेट ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी राज्य सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आरडीजी अनुदान और जीएसटी हिस्सेदारी जैसे मुद्दों के कारण हिमाचल वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए प्रयासरत है।