Summer express/शिमला-: भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने एचआरटीसी की नई हिम बस प्लस कार्ड व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ग्रीन कार्ड, स्मार्ट कार्ड और सम्मान कार्ड को बंद कर नई व्यवस्था लागू करने से आम यात्रियों को वास्तविक रूप से कितना फायदा मिलेगा।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि समाचार रिपोर्टों के अनुसार एचआरटीसी ने पुराने ग्रीन, स्मार्ट और सम्मान कार्ड बनाना बंद कर दिए हैं। इन कार्डों के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों को 10 से 30 प्रतिशत तक किराया रियायत मिलने की बात सामने आई थी। अब इनकी जगह ₹365 वार्षिक वैधता वाला हिम बस प्लस कार्ड लागू किया गया है, जिसमें सामान्य यात्रियों के लिए पांच प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 15 प्रतिशत छूट का प्रावधान बताया गया है।उन्होंने सवाल उठाया कि जिन यात्रियों को पुरानी व्यवस्था में अधिक रियायत मिलती थी, उन्हें नई व्यवस्था से कितना आर्थिक नुकसान या लाभ होगा, इसका सरकार को स्पष्ट तुलनात्मक ब्यौरा देना चाहिए।
₹1,000 खर्च के बाद ₹100 कैशबैक, योजना पर उठे सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने हिम बस प्लस कार्ड के तहत घोषित कैशबैक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि योजना के अनुसार एक महीने में ₹1,001 से ₹1,500 तक यात्रा खर्च करने पर ₹100, ₹1,501 से ₹2,000 तक ₹200, ₹2,001 से ₹3,000 तक ₹300 और ₹3,001 से ₹4,000 तक खर्च करने पर ₹500 कैशबैक का प्रावधान बताया गया है।इसी तरह ₹4,001 से ₹5,000 तक ₹750, ₹5,001 से ₹7,500 तक ₹1,000, ₹7,501 से ₹10,000 तक ₹1,500 तथा ₹10,000 से अधिक मासिक यात्रा खर्च पर ₹2,000 कैशबैक दिए जाने की बात कही गई है।भारद्वाज ने पूछा कि हिमाचल प्रदेश में कितने सामान्य यात्री हर महीने बस यात्रा पर ₹5,000 या ₹10,000 खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि जो यात्री महीने में ₹500 या ₹800 की यात्रा करते हैं, उन्हें इस योजना से क्या लाभ मिलेगा, सरकार को इसका भी जवाब देना चाहिए।
तत्काल छूट की जगह मासिक कैशबैक क्यों?
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में निर्धारित छूट टिकट खरीदते समय ही मिल जाती थी, जबकि नई व्यवस्था में यात्री को पहले पूरे महीने यात्रा करनी होगी और तय सीमा तक खर्च करने के बाद ही कैशबैक की पात्रता बनेगी।उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार पात्र कैशबैक राशि अगले महीने की 10 तारीख को खाते में भेजे जाने का प्रावधान है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि तत्काल मिलने वाली किराया रियायत को मासिक कैशबैक व्यवस्था में बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कोई यात्री निर्धारित मासिक खर्च की सीमा तक नहीं पहुंच पाता है तो उसके लिए नई व्यवस्था में क्या लाभ उपलब्ध रहेगा।
ग्रामीण और कम आय वाले यात्रियों पर असर का सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में एचआरटीसी की बसें लाखों लोगों की दैनिक जरूरत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और कम आय वाले परिवारों की बड़ी संख्या सरकारी परिवहन पर निर्भर रहती है।उन्होंने कहा कि किराया रियायतों में बदलाव का सीधा असर यात्रियों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने कार्ड बंद करने से पहले यात्रियों और संबंधित वर्गों से कोई परामर्श किया गया था या नहीं।
उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण के साथ वरिष्ठ नागरिकों तथा डिजिटल सुविधाओं से परिचित न होने वाले ग्रामीण यात्रियों के लिए ऑफलाइन और सरल विकल्प भी उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि पात्र यात्रियों को नई व्यवस्था में परेशानी न हो।
सरकार से मांगा पुरानी और नई व्यवस्था का पूरा हिसाब
संदीपनी भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और परिवहन विभाग से मांग की कि पुराने ग्रीन, स्मार्ट और सम्मान कार्ड के तहत पंजीकृत यात्रियों की संख्या, उन्हें मिलने वाली कुल वार्षिक रियायत और हिम बस प्लस कार्ड के तहत अनुमानित लाभ का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक किया जाए।उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि नई व्यवस्था में किन श्रेणियों के यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक और किन्हें कम छूट मिलेगी।
भारद्वाज ने कहा, “सरकार कैशबैक की बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने के बजाय आम यात्री की जेब का हिसाब दे। यदि किसी यात्री को पहले टिकट पर तत्काल अधिक छूट मिल रही थी और अब उसे कम छूट के साथ कैशबैक की शर्तें पूरी करनी पड़ रही हैं, तो सरकार को बताना चाहिए कि इसमें यात्री का वास्तविक लाभ कहां है?”
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य केवल निगम का राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता को सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध करवाना भी है। उन्होंने सरकार से नई कार्ड व्यवस्था की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी भी पात्र वर्ग की पहले से उपलब्ध सुविधाओं में अनुचित कटौती न हो।