Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:कांगड़ा जिला में बेसहारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। जिले में संचालित 28 गौ सदनों की कुल क्षमता करीब 5 हजार पशुओं की है, लेकिन इनमें वर्तमान में लगभग 3 हजार पशु ही रखे गए हैं। इसके बावजूद करीब 6,500 बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़ों से सामने आई यह स्थिति स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के सामने बड़ी चुनौती है।जिले में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु न केवल यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं, बल्कि इनके कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। इसके अलावा पशु खेतों में पहुंचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
गौ सदनों में 2 हजार पशुओं की जगह
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले के 28 गौ सदनों में करीब 5 हजार पशुओं को रखने की क्षमता है। वर्तमान में इनमें लगभग 3 हजार पशु रखे गए हैं। ऐसे में करीब 2 हजार पशुओं को और गौ सदनों में रखा जा सकता है। यदि उपलब्ध क्षमता का इस्तेमाल किया जाए तो सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की संख्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
पंचायतों और नगर निकायों को निर्देश
पशुपालन विभाग ने पंचायतों और नगर निकायों को सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित रूप से गौ सदनों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार जब किसी नगर निकाय या पंचायत की ओर से पशुओं को गौ सदन भेजने का अनुरोध प्राप्त होता है, तो उपलब्ध क्षमता के आधार पर अनुमति दी जाती है। इसके बाद पशुओं को गौ सदन तक पहुंचाने की व्यवस्था संबंधित स्तर पर की जाती है।विभाग का कहना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि उपलब्ध क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें, तो सड़कों पर घूम रहे करीब 2 हजार बेसहारा पशुओं को गौ सदनों में पहुंचाया जा सकता है।