Summer express/ऊना, राकेश-जिंदगी ने बचपन में ही करनदीप से माता-पिता का साया छीन लिया, लेकिन मुश्किल हालात भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सके। महज तीन महीने की उम्र में मां का निधन हो गया और पांचवीं कक्षा में पढ़ते समय पिता भी दुनिया से चले गए। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे करनदीप ने अपनी बड़ी बहनों के सहयोग और खुद की मेहनत से जिंदगी में आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। आज 24 वर्षीय करनदीप न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी हुनर सिखाकर उनके लिए रोजगार की राह तैयार कर रहे हैं।हरोली उपमंडल के रोड़ा गांव के रहने वाले करनदीप ने 12वीं कक्षा के बाद हेयर सैलून का काम सीखना शुरू किया। अपने हुनर को निखारने के लिए उन्होंने वर्ष 2019-20 में करीब दो साल तक गुरुग्राम में काम किया। इसके बाद वर्ष 2021 से 2024 तक ऊना और वर्ष 2024-25 में हरोली में काम करते हुए उन्होंने सैलून संचालन का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। लंबे समय से उनका सपना था कि एक दिन वे अपना कारोबार शुरू करें।
करनदीप को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी आईसीडीएस विभाग के माध्यम से मिली। वर्ष 2025 में योजना के तहत उन्हें हर माह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। इस सहयोग ने उन्हें अपने भविष्य को लेकर आगे की योजना बनाने का अवसर दिया। इसी बीच वर्ष 2026 में स्वरोजगार शुरू करने के लिए योजना के तहत दो लाख रुपये की सहायता मिली। इसके बाद वर्षों से देखा अपना कारोबार शुरू करने का सपना हकीकत में बदल गया।फरवरी 2026 में करनदीप ने ऊना के रामपुर में किराये पर दुकान लेकर ‘रॉयल लुक’ नाम से हेयर सैलून शुरू किया। मिली आर्थिक सहायता में से करीब 1.40 लाख रुपये उन्होंने सैलून के लिए जरूरी सामान और उपकरण खरीदने पर खर्च किए, जबकि शेष 60 हजार रुपये दुकान की अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में लगाए। शुरुआत सीमित संसाधनों से हुई, लेकिन वर्षों के अनुभव और मेहनत ने धीरे-धीरे कारोबार को गति दे दी।
आज ‘रॉयल लुक’ से करनदीप हर माह करीब 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे अपने हुनर को केवल अपने तक सीमित नहीं रख रहे। वर्तमान में चार युवा उनके सैलून में हेयर सैलून का काम सीख रहे हैं। करनदीप उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ करीब दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह भी दे रहे हैं। इससे पहले एक युवक यहां काम सीखने के बाद दुबई जा चुका है।
करनदीप बताते हैं कि माता-पिता के निधन के बाद उनकी दोनों बड़ी बहनों ने सिलाई-कढ़ाई का काम कर उनकी परवरिश की। पिता लुधियाना में हलवाई का काम करते थे। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है और अब करनदीप अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उनका लक्ष्य रामपुर स्थित ‘रॉयल लुक’ को विस्तार देना है, ताकि आने वाले समय में अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर मिल सके।
योजना ने दिया आत्मनिर्भर बनने का अवसर
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत विशेष देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों और युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों को मासिक आर्थिक सहायता के अलावा स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है।हिमाचल प्रदेश ने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा देकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने की पहल की है। करनदीप की कहानी इसी तरह के सहयोग से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते एक युवा की कहानी है। वे कहते हैं कि योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उनके सपने को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके लिए वे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।