Summer express/मंडी/ धर्मवीर -:चंडीगढ़ से मनाली तक फोरलेन का सफर अब सिर्फ आसान और आरामदायक ही नहीं रहा, बल्कि यह सफर हिमाचली संस्कृति से रूबरू करवाने वाला भी बन गया है। फोरलेन की टनलों के मुहानों पर बनाए गए खूबसूरत चित्रों में हिमाचल की कला, परंपरा, धार्मिक आस्था और लोक जीवन के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। मंडी जिला में इन चित्रों को मशहूर मंडी कलम के जरिए तैयार किया गया है। कहीं कुल्लू दशहरे की झलक है तो कहीं पराशर ऋषि की तपोस्थली दिखाई दे रही है।
टनलों के मुहानों पर संस्कृति का रंग
हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के साथ-साथ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और कला के लिए भी जाना जाता है। प्रदेश में आने वाले पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेने के साथ यहां की परंपराओं, मेलों, धार्मिक स्थलों और जीवनशैली को करीब से जानने में भी रुचि रखते हैं।इसी संस्कृति को नए अंदाज में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास अब कीतरपुर-मनाली फोरलेन पर भी देखने को मिल रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई की ओर से फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बनी टनलों के मुहानों को आकर्षक चित्रों से सजाया गया है। इन चित्रों के माध्यम से हिमाचल की संस्कृति और विरासत को रंगों के जरिए प्रदर्शित किया गया है।
मंडी कलम में दिखी हिमाचल की पहचान
मंडी जिला में इन चित्रों को तैयार करने के लिए प्रसिद्ध मंडी कलम का सहारा लिया गया है। मंडी कलम के कलाकार राजेश कुमार ने अपनी टीम के साथ टनलों के मुहानों पर विभिन्न विषयों को चित्रों का रूप दिया है।इन चित्रों में कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्रि, पराशर ऋषि और राजशाही की झलक देखने को मिलती है। इसके अलावा प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों, हिमाचली खान-पान, वेशभूषा और रहन-सहन को भी चित्रों में स्थान दिया गया है। रंग-बिरंगे फूलों के साथ हिमाचल के पशु-पक्षी भी इन कलाकृतियों का हिस्सा बने हैं।
पर्यटकों को संस्कृति से जोड़ने की कोशिश
कलाकार राजेश कुमार के मुताबिक इन चित्रों का मकसद केवल टनलों को आकर्षक बनाना नहीं है, बल्कि इनके जरिए हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को पर्यटकों तक पहुंचाना भी है। फोरलेन से गुजरने वाले लोगों को इन चित्रों के माध्यम से प्रदेश की कला, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी मिल सके, इसी उद्देश्य के साथ अलग-अलग विषयों को चित्रों में शामिल किया गया है।
आगे भी किए जाएंगे नए प्रयोग
एनएचएआई की योजना टनलों के मुहानों तक ही सीमित नहीं है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरूण चारी के अनुसार फोरलेन प्रोजेक्ट को लोगों के लिए यादगार अनुभव बनाने की दिशा में अन्य स्थानों पर भी नए और रचनात्मक कार्य किए जाने की योजना है। उनका कहना है कि हिमाचल की संस्कृति को इस तरह प्रदर्शित करने से प्रदेश की पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिलेगी।
कीतरपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद चंडीगढ़ से मनाली तक का सफर पहले की तुलना में काफी सुगम हुआ है। रास्ते में पहाड़ों और प्राकृतिक खूबसूरती के नजारे तो पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन अब टनलों पर बनी ये कलाकृतियां भी सफर का नया आकर्षण बन रही हैं।प्रकृति के साथ कला और संस्कृति का यह मेल फोरलेन से गुजरने वाले लोगों को हिमाचल की एक अलग तस्वीर दिखा रहा है। टनलों के मुहानों पर सजे मंडी कलम के ये रंग प्रदेश की समृद्ध विरासत को नई पहचान देने की दिशा में एक खूबसूरत पहल के रूप में नजर आ रहे हैं।