Summer express/शिमला, संजू:शिमला के संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण के दौरान मकानों में आई दरारों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रभावित लोगों ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षा सुनिश्चित करने और नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। इसी सिलसिले में शांति विहार वार्ड का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मिला। प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात करेगा।शांति विहार वार्ड के पार्षद विनीत शर्मा, कमला नगर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर और पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान ने निर्माण कार्य के कारण भवनों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि टनल निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों की जान-माल सुरक्षित रह सके।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने यह भी मांग उठाई कि जिन भवनों को निर्माण कार्य से गंभीर नुकसान पहुंचा है, उनका उचित आकलन किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित भवनों को अधिग्रहित कर लोगों को नुकसान की भरपाई दी जाए। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके घर टनलिंग कार्य के कारण खतरे में नहीं पड़ने चाहिए।वहीं, कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि संजौली, भट्टाकुफर और ढली में टनल निर्माण से प्रभावित क्षेत्रों का मामला गंभीर है। उनके अनुसार करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी दरारें सामने आई हैं और कुछ मकानों की स्थिति को लेकर खतरा बना हुआ है। मंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए मामले की तकनीकी जांच की आवश्यकता बताई।
जिला शिमला उपायुक्त अनुपम कश्यप द्वारा स्थिति का जायजा लेने के बाद फिलहाल निर्माण कार्य की अनुमति वापस लेते हुए काम रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ जल्द उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। उन्होंने पर्यावरणविदों, भूवैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए हाई पावर कमेटी गठित करने का सुझाव दिया।मंत्री ने कहा कि समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश से करवाने पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।