Summer express/गुलेर,गुलशन धनोहा -:ऐतिहासिक गुलेर क्षेत्र की विरासत को संरक्षित करने और उसे पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय नंदपुर किले को गोद लेकर इसके संरक्षण, दस्तावेजीकरण और पर्यटन विकास के लिए कार्य करेगा। इसके साथ ही गुलेर को व्यापक हेरिटेज सर्किट से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत विश्वविद्यालय के पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन स्कूल की ओर से नंदपुर किला, गुलेर में ‘गुलेर बौद्धिक विमर्श-विरासत की पुनर्कल्पना की रूपरेखा’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गुलेर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को संरक्षित करने के साथ स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नंदपुर किला के वारिस राघव गुलेरिया ने की। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री नागेंद्र सिंह रावल मुख्य अतिथि रहे, जबकि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी बंसल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
किले के संरक्षण पर विश्वविद्यालय करेगा काम
कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालय नंदपुर किले को गोद लेकर इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में कार्य करेगा। पर्यटन विभाग के सहयोग से गुलेर क्षेत्र में नए पर्यटन प्रकल्प विकसित करने की संभावनाएं भी तलाश की जाएंगी।उन्होंने कहा कि गुलेर और आसपास के क्षेत्रों में ऐतिहासिक स्थलों की समृद्ध श्रृंखला मौजूद है। इन्हें एक व्यवस्थित हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित कर पर्यटन के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसर भी पैदा होंगे।
कांगड़ा मिनिएचर कला को फिर से पहचान दिलाने की पहल
गुलेर की कला परंपरा को कांगड़ा मिनिएचर कला के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय इस विरासत के पुनर्जीवन पर भी काम करेगा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विजुअल एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स से जुड़े विशेषज्ञों को इस दिशा में शोध और रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जाएगा।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुलेर की कला पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
गुलेर की विरासत पर बनेगी कॉफी टेबल बुक
विश्वविद्यालय गुलेर की कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर कॉफी टेबल बुक भी तैयार करेगा। इसमें पुरानी मिनिएचर कला, चित्रकला, ऐतिहासिक स्थलों और विद्यार्थियों की कलाकृतियों को शामिल किया जाएगा।
प्रो. बंसल ने बताया कि दस्तावेजीकरण के माध्यम से ऐसी कला और विरासत को सामने लाने का प्रयास होगा, जो समय के साथ लोगों की नजरों से दूर होती गई है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य करीब एक महीने में इस पुस्तक को तैयार करने का है।
नंदपुर किले में म्यूजियम बनाने की योजना
नंदपुर किले में भविष्य में म्यूजियम विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित है। किले की दीवारों पर विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को संरक्षित किया जाएगा। प्रस्तावित म्यूजियम के माध्यम से पर्यटकों को गुलेर के इतिहास, कला और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिल सकेगा।कुलपति ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जा सकता है। तकनीक के माध्यम से विरासत का दस्तावेजीकरण और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
हेरिटेज टूरिज्म सर्किट में शामिल करने की तैयारी
27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों से पहले विश्वविद्यालय की ओर से सप्ताहभर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इस वर्ष हेरिटेज और रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पर विशेष जोर दिया जा रहा है।विश्वविद्यालय गुलेर को हेरिटेज टूरिज्म सर्किट से जोड़ने के लिए पहले शैक्षणिक सम्मेलन और विमर्श आयोजित करेगा। इसके बाद व्यापक स्तर पर इस ऐतिहासिक क्षेत्र को पर्यटन सर्किट में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।