summer express ,राकेश कुमार शर्मा, करनाल। करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी दक्षता और गन्ना विकास के क्षेत्र में एक बार फिर उपलब्धि दर्ज की है। हरियाणा की सहकारी चीनी मिलों के इतिहास में पहली बार करनाल शुगर मिल को तकनीकी दक्षता के लिए लगातार चौथी बार देश में प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके अलावा वर्ष 2025-26 के लिए गन्ना विकास के क्षेत्र में भी मिल को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल हुआ है।
22 सितंबर को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, विंडसर पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिल को दोनों राष्ट्रीय पुरस्कारों की ट्रॉफियां प्रदान कीं। इस अवसर पर हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा भी मौजूद रहे। पुरस्कार उपायुक्त एवं मिल के अध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार शर्मा और प्रबंध निदेशक अदिति ने प्राप्त किए।
मिल की प्रबंध निदेशक अदिति ने बताया कि कम रिकवरी वाले क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद करनाल शुगर मिल ने तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025-26 में गन्ना विकास के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के साथ मिल को गुणवत्ता प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 9001:2015 का प्रमाणन भी प्राप्त हुआ है। मिल प्रबंधन के अनुसार पिछले 15 वर्षों में यह प्रमाणन हासिल करने वाली हरियाणा की पहली चीनी मिल होने का दावा है।
पिछले पेराई सत्र 2024-25 में मिल ने 98.55 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ 48 लाख 10 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की। इस दौरान 4 लाख 55 हजार क्विंटल रिफाइंड चीनी का उत्पादन हुआ। पावर टरबाइन की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए मिल ने बिजली उत्पादन और बिक्री में भी प्रदर्शन किया तथा करीब 22 करोड़ 67 लाख रुपये की बिजली बेची।
करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1976 में 116 एकड़ भूमि पर 1250 टीसीडी की प्रारंभिक क्षमता के साथ हुई थी। वर्ष 1976-77 में पहला पेराई सत्र शुरू हुआ। गन्ने के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ वर्ष 1991-92 में मिल की क्षमता बढ़ाकर 2200 टीसीडी की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री स्वर्ण जयंती परियोजना के तहत वर्ष 2021 में क्षमता विस्तार कर इसे 3500 टीसीडी किया गया।
मिल में आधुनिक तकनीक से सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी का उत्पादन किया जा रहा है। चीनी के अलावा शीरा, बिजली, प्रेस मड और खोई जैसे उप-उत्पादों का भी उत्पादन और बिक्री की जाती है। 3500 टीसीडी क्षमता वाले नए रिफाइंड शुगर प्लांट के साथ 18 मेगावाट के सह-उत्पादन संयंत्र की स्थापना से मिल की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। मिल प्रबंधन के अनुसार पिछले तीन वर्षों से मिल नकद लाभ में है और किसानों को गन्ने का भुगतान अपने स्रोतों से किया जा रहा है।
मिल प्रबंधन के अनुसार तकनीकी दक्षता, गन्ना विकास, वित्तीय प्रबंधन और चीनी रिकवरी सहित विभिन्न श्रेणियों में करनाल शुगर मिल अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 23 बार प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है। प्रबंधन ने मुनाफे से किसानों और अन्य हितधारकों को लाभांश वितरित करने का भी दावा किया है।