Summer express/हमीरपुर, अरविंद-:भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। हमीरपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राणा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं को डराने के लिए पुलिस और कानूनी मामलों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि कोई विधायक लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की नीतियों और कमियों पर सवाल उठाता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज कर दिया जाता है।राणा ने कहा कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज किए जा रहे मामले ज्यादा समय तक टिकने वाले नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ये मामले दिवाली के पटाखों की तरह साबित होंगे। उन्होंने सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि आखिर सरकार को अपने विरोधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है।
राणा ने कहा कि हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने जब जमीन से जुड़े मामले को लेकर सवाल उठाए तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दिसंबर 2022 में शपथ लेने के बाद उनके खाते में 18 लाख रुपये आने और जमीन की कीमत में कथित तौर पर हुए बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि वह बड़े ही ‘स्मार्ट’ तरीके से काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 70 हजार रुपये की जमीन की वैल्यूएशन 76 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। राणा ने कहा कि इस पूरे मामले में उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने के बजाय कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा रहा है। उन्होंने बीएनएस की धाराओं के इस्तेमाल को लेकर भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कानून की धाराओं के अर्थ तक बदलकर पेश किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री कार्यालय के कायाकल्प को लेकर भी राणा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा मुख्यमंत्री कार्यालय को आधुनिक बनाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि हेरिटेज बिल्डिंग के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ क्यों की गई, जबकि मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।राणा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण और कायाकल्प पर अब तक करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और आने वाले समय में यह खर्च 50 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश पर कर्ज बढ़ रहा है और अस्पतालों में दवाइयों तथा सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर समस्याएं हैं, तो ऐसे समय में नए कार्यालय पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी।उन्होंने कहा कि सरकार को जनता से जुड़े मूलभूत मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।