summer express , मोनिका रावत,चंडीगढ़। शहर की विरासत से जुड़े पियरे जेनरे के फर्नीचर की विदेशों में प्रस्तावित नीलामी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पेरिस और नीदरलैंड में चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों से जुड़े फर्नीचर की नीलामी प्रस्तावित है। पेरिस की नीलामी सूची में एक कुर्सी की provenance यानी मूल स्रोत ‘Administrative buildings – Chandigarh’ दर्ज किया गया है। इसके बाद एडवोकेट और यूटी एडवाइजर कमेटी के सदस्य अजय जग्गा ने विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
पेरिस स्थित आर्टक्यूरियल में 30 सितंबर को ‘इंटीरियर मोटिव्स : आर्टक्यूरियल एक्स रिफ्लेक्शंस’ नीलामी आयोजित होनी है। इसमें पियरे जेनरे की वर्ष 1958 की ‘चेयर वी टाइप केन सीट केन बैक’ को लॉट नंबर 73 में शामिल किया गया है। ठोस सागौन और बेंत से बनी इस कुर्सी की अनुमानित कीमत 4,000 से 6,000 यूरो रखी गई है। कैटलॉग में इसके स्रोत के तौर पर चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा नीदरलैंड की Hessink’s Fine Art Auctioneers में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित नीलामी में पियरे जेनरे की दो X-Leg Armchairs को लॉट नंबर 28 में रखा गया है। इनकी अनुमानित कीमत 5,000 से 7,000 यूरो बताई गई है। नीलामी कैटलॉग में इन दोनों कुर्सियों की provenance ‘From the Administrative Buildings, Chandigarh, India’ दर्ज है।
अजय जग्गा ने सवाल उठाया है कि यदि नीलामी कैटलॉग में फर्नीचर को चंडीगढ़ के प्रशासनिक भवनों से संबंधित बताया गया है तो यह जांच जरूरी है कि ये वस्तुएं कब और किस प्रक्रिया के तहत भारत से बाहर गईं। उन्होंने संबंधित नीलामी घरों से consignor declaration, खरीद-बिक्री दस्तावेज, निर्यात-आयात रिकॉर्ड, कस्टम दस्तावेज और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड हासिल करने की मांग की है।
उन्होंने विदेश मंत्रालय से फ्रांस और नीदरलैंड के संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने तथा दोनों नीलामी घरों को औपचारिक सूचना देकर जांच पूरी होने तक संबंधित लॉट की नीलामी रोकने का अनुरोध किया है।
जग्गा ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में फर्नीचर के सरकारी स्वामित्व या उसे अवैध तरीके से विदेश ले जाने की पुष्टि होती है तो उसकी वापसी और चंडीगढ़ में पुनर्स्थापना की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही उन्होंने शहर के विरासत फर्नीचर का केंद्रीय डाटाबेस तैयार करने, लापता वस्तुओं की सूची बनाने और हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल (HIPC) को प्रभावी रूप से सक्रिय करने की मांग की है।