Summer express/शिमला-: मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। सिरमौर के सराहां में वामन द्वादशी मेले के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना, कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ, आपदा राहत और प्रदेश की आर्थिक स्थिति सहित कई मुद्दों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट की।मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना को लेकर हुए हालिया समझौते से हिमाचल प्रदेश को बड़ी वित्तीय राहत मिली है। उनके अनुसार, राज्य को परियोजना की लागत वहन नहीं करनी होगी, जिससे प्रदेश के खजाने के करीब 3,000 करोड़ रुपये बचेंगे। परियोजना शुरू होने के बाद हिमाचल को सालाना करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की लंबित राशि को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं और उम्मीद है कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय से हिमाचल के पक्ष में जल्द फैसला आएगा।
वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 वर्ष लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राज्य को सफलता मिली है। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के फैसले के बाद राज्य के खजाने में 401 करोड़ रुपये जमा हुए हैं और होटल से हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
डीए की बाकी किस्तें उचित समय पर देने का आश्वासन
प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से राज्य को करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर वेतन व पेंशन देने के साथ लंबित देनदारियों का भुगतान कर रही है। उन्होंने कहा कि क्लास-3 पेंशनरों का पूरा बकाया चुका दिया गया है और कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की शेष किस्तें भी उचित समय पर जारी की जाएंगी।सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में पुरानी पेंशन योजना बहाल की थी। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में और कर्मचारियों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
ग्रामीण आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। लक्ष्य ग्रामीण परिवारों की मासिक आय को 25 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक करना है। किसानों और पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि और प्राकृतिक खेती से पैदा होने वाली फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान किया गया है। अदरक को भी समर्थन मूल्य व्यवस्था में शामिल किया गया है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सरकारी स्तर पर सीबीएसई स्कूल खोले जा रहे हैं। निजी सीबीएसई स्कूलों में जहां शिक्षा पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च होता है, वहीं सरकार कम लागत में समान सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है।
आपदा प्रभावितों के लिए राहत राशि बढ़ाने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से सहायता राशि 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 8.5 लाख रुपये की है। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से हिमाचल के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि अभी तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है।उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सरकार ने करीब 3,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि बचाई है। इस राशि का इस्तेमाल अनाथ बच्चों, विधवाओं और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण में किया जा रहा है।इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के चेक वितरित किए और स्मारिका का विमोचन भी किया।उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने सिरमौर क्षेत्र के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक आपदा और राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए भाजपा पर निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया।
पूर्व मंत्री गंगूराम मुसाफिर ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आने के समय करीब 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज और कर्मचारियों से संबंधित लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां विरासत में मिली थीं। उन्होंने सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।कांग्रेस नेता दयाल प्यारी ने पच्छाद क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने हालिया टीजीटी भर्ती में पच्छाद क्षेत्र को अधिक शिक्षक मिलने की बात भी कही।