मोनिका रावत | चंडीगढ़
समर न्यूज
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारी और बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह बाजवा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज मनी लांड्रिंग मामले में आरोप है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए घर खरीदारों से प्राप्त रकम का कथित तौर पर दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल और धन का हस्तांतरण किया गया। जस्टिस मनीषा बत्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मौजूदा स्तर पर ऐसा आधार नहीं है जिससे यह माना जा सके कि आरोपित अपराध में याचिकाकर्ता दोषी नहीं है।
45 एफआइआर के आधार पर दर्ज हुई थी ईसीआईआर
मामला मोहाली और आसपास बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड की परियोजनाओं, विशेष रूप से सनी एन्क्लेव, से जुड़ा है। आदेश के अनुसार वर्ष 2017 से खरीदारों की शिकायतों पर कई एफआइआर दर्ज हुई थीं। इनमें बिक्री विलेख का निष्पादन न करना या देरी, कब्जा न देना, प्लाट नंबर बदलना और एक ही संपत्ति को एक से अधिक खरीदारों को बेचने जैसे आरोप लगाए गए थे। ईडी के अनुसार जांच के दौरान ऐसी 45 एफआइआर सामने आईं, जिनके आधार पर अपराध की आय का पता लगाने के लिए ईसीआईआर दर्ज की गई।
तलाशी में खाते फ्रीज, नकदी और लग्जरी वाहन मिले
हाई कोर्ट के आदेश में दर्ज तथ्यों के मुताबिक मई 2025 में बाजवा और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई। इस दौरान याचिकाकर्ता, उसके परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं के कई बैंक खातों में करीब 3.31 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की गई। करीब 42 लाख रुपये नकद मिलने के अलावा रेंज रोवर, बीएमडब्ल्यू, लैंड क्रूजर, पोर्श और अन्य वाहनों की कुल करीब 1.07 करोड़ रुपये की कीमत बताई गई। ईडी ने दस्तावेजों के आधार पर धन के कथित हस्तांतरण और परत-दर-परत लेनदेन की जांच की।