समर न्यूज | फगवाड़ा
पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने 20 आरोपियों की पहचान कर उन्हें नामजद किया है। पुलिस के ताजा दावे के मुताबिक इनमें से 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में 7 छात्र और 2 बाहरी लोग बताए गए हैं।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की है। डीआईजी नवीन सिंगला के मुताबिक, हिंसा के दौरान पुलिस और मीडिया पर पथराव किया गया तथा कई वाहनों में तोड़फोड़ के अलावा कुछ वाहनों को आग भी लगाई गई।
पुलिस का कहना है कि शुरुआत में बल प्रयोग नहीं किया गया था, लेकिन पथराव और आगजनी के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया गया। मामले में सतनामपुरा और सदर फगवाड़ा थानों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। कुल चार एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। हिंसा के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शित मिग-23यूएम लड़ाकू विमान पर चढ़े युवक की भी पहचान कर ली गई। पुलिस के मुताबिक वह नाबालिग है और एलपीयू का छात्र है। उसकी पहचान सीसीटीवी फुटेज के जरिए हुई। पुलिस ने उसे हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से पकड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसके पिता मंडी के उपायुक्त कार्यालय में अधिकारी हैं।
विमान पर खड़े युवक की तस्वीर हिंसा के दौरान सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुई थी। पुलिस जांच में सोनीपत निवासी एलपीयू छात्र जेम्स दहिया, फगवाड़ा निवासी गगनदीप और जसमीत समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। जेम्स दहिया सोशल मीडिया पर सक्रिय था और विश्वविद्यालय परिसर में एक रेस्टोरेंट भी चलाता था। पुलिस का आरोप है कि वह हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल था।
गगनदीप व जसमीत को लेकर पुलिस का दावा है कि वे पिज्जा डिलीवरी का काम करते हैं और हिंसा की सूचना मिलने के बाद परिसर पहुंचे थे। पुलिस उनके पहुंचने के उद्देश्य की भी जांच कर रही है।
}अफवाह से शुरू हुआ था विवाद
एलपीयू में हिंसा 27 सितंबर के आसपास सोशल मीडिया पर प्रसारित उस दावे के बाद भड़की थी, जिसमें एक छात्रा के साथ छात्रावास में कथित यौन उत्पीड़न की बात कही गई थी। विश्वविद्यालय ने आरोप को अफवाह और निराधार बताया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया था। जांच में अब तक कथित घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
{हाईवे जाम और संपत्ति को नुकसान: हिंसा के दौरान छात्रों ने परिसर में तोड़फोड़ की और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर लंबा जाम लगाया। पुलिस के अनुसार कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और आगजनी भी हुई। विश्वविद्यालय ने तनाव के बाद 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी थीं तथा मध्यावधि परीक्षाएं भी टाल दी थीं। मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
चितकारा यूनिवर्सिटी हिंसा मामले में भी दो आरोपी गिरफ्तार
पटियाला | राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में हाल में हुए छात्र विरोध और हिंसा के मामले में पटियाला पुलिस ने दो पूर्व छात्रों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों पर सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैलाकर मौजूदा छात्रों को उकसाने का आरोप है। अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच के बाद दोनों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक, परिसर में दो छात्राओं के लापता होने और अन्य घटनाओं से जुड़ी अपुष्ट बातें सोशल मीडिया पर तेजी से फैली थीं।
इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जुटे और विरोध प्रदर्शन हुआ। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस के साथ झड़प और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने संबंधित दावों को गलत बताया था। पुलिस अब सोशल मीडिया पोस्ट, संदेशों और वीडियो की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों की भूमिका की जांच जारी है और डिजिटल माध्यम से माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले विश्वविद्यालय ने भी छात्रों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी। मामले में गिरफ्तारियां होने के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।