समर न्यूज | अमृतसर
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आम आदमी पार्टी सरकार ने महिला लाभार्थियों पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तरनतारन के गोइंदवाल साहिब में ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ की दूसरी किस्त जारी की।
इसके तहत 36,87,677 महिलाओं के बैंक खातों में अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर की तीन महीने की सहायता राशि सीधे भेजी गई। कुल राशि 1,262.54 करोड़ रुपये है। सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को तीन महीने के लिए 3,000 रुपये और अनुसूचित जाति की पात्र महिलाओं को 4,500 रुपये मिलेंगे। यह योजना जुलाई में शुरू की गई थी। सरकार के अनुसार, इससे पहले 73.99 लाख महिलाओं के खातों में 2,562.33 करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई जा चुकी थी। ताजा किस्त के बाद योजना के तहत अब तक कुल 3,824.87 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में भेजे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने योजना का दायरा बढ़ाकर एक करोड़ महिलाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया है। करीब 97 प्रतिशत महिलाएं इसके दायरे में आ सकती हैं।
{सीधे खाते में राशि: सरकार की योजना में राशि सीधे बैंक खातों में भेजने पर जोर है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पात्रता पूरी करने वाली एक ही परिवार की एक से अधिक महिलाओं को भी सहायता मिल सकती है। योजना के लिए पंजीकरण में ‘सत्कार सखियों’ की भूमिका बताई गई है। सरकार के मुताबिक 1.37 लाख सत्कार सखियों को पंजीकरण में योगदान के लिए 51 करोड़ रुपये से अधिक प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रोत्साहन राशि का प्रावधान बताया गया है।
{चुनाव से पहले महिला संपर्क: महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली इस योजना का विस्तार ऐसे समय हो रहा है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। सरकार इसे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर पेश कर रही है। वहीं, राजनीतिक रूप से यह योजना बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों तक सरकार की सीधी पहुंच का माध्यम भी बन रही है। हालांकि, योजना का राजनीतिक प्रभाव चुनाव के दौरान मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
{विपक्ष पर मान का हमला: गोइंदवाल साहिब के कार्यक्रम में मान ने सरकार की योजनाओं का उल्लेख करने के साथ कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यदि विपक्षी दल सत्ता में आते हैं तो महिलाओं की मासिक सहायता, मुफ्त बिजली और बस यात्रा जैसी सुविधाएं बंद हो सकती हैं। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है; इन योजनाओं के भविष्य को लेकर संबंधित दलों की अपनी नीतियां और घोषणाएं अलग हो सकती हैं।