समर न्यूज | चंडीगढ़
‘वारिस पंजाब दे’ के सामने पंजाब की राजनीति में आगे बढ़ने से पहले नई चुनौती आ गई है। संगठन के राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने आयोग को चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
संगठन ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए पंजीकरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की थी। आयोग की ओर से अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में अब संगठन के आवेदन पर आयोग की स्थिति और अदालत में दिए जाने वाले जवाब पर सबकी नजर रहेगी। पंजीकरण और चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट होना संगठन के लिए तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी। संगठन ने जनवरी 2025 में निर्वाचन आयोग के समक्ष राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। लंबे समय तक निर्णय नहीं होने के बाद संगठन ने अदालत का रुख किया। संगठन की ओर से कहा गया कि विधानसभा चुनाव मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं और चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से पहले पंजीकरण तथा चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। संगठन ने अदालत से निर्वाचन आयोग को आवेदन पर तय समयसीमा में फैसला करने का निर्देश देने का आग्रह किया।
अदालत ने तत्काल कोई आदेश देने के बजाय निर्वाचन आयोग का पक्ष जानना उचित समझा। आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि आवेदन पर निर्णय लेने में कितना समय लग सकता है।
{राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोग की चिंता: निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत में पेश वकील ने कहा कि संगठन के पंजीकरण से जुड़े मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी कुछ चिंताएं हैं। आयोग ने कहा कि आवेदन पर विचार करते समय इन पहलुओं को भी देखा जाना है। इससे पहले संगठन के नेताओं ने आयोग के रुख पर सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि पंजीकरण की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है। हालांकि, ये संगठन की ओर से लगाए गए आरोप हैं। आयोग की ओर से अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया गया है।
{चुनावी तैयारी पर असर: ‘वारिस पंजाब दे’ ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर रखी है, लेकिन अभी उसे निर्वाचन आयोग से राजनीतिक दल के रूप में औपचारिक पंजीकरण और चुनाव चिह्न नहीं मिला है। संगठन ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए हैं। ऐसे में पंजीकरण का फैसला उसके चुनावी कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पार्टी विभिन्न पहलुओं पर मंथन कर रही है।