Summer express/बिलासपुर, सुभाष-: हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से मछली लाकर बेचने के विरोध में गोबिंद सागर फिशरीज को-ऑपरेटिव मार्केटिंग एंड सप्लाई फेडरेशन लिमिटेड ने आंदोलन की चेतावनी दी है। फेडरेशन का कहना है कि बाहरी मछली की लगातार आपूर्ति से प्रदेश के स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। संगठन ने सरकार और मत्स्य विभाग को सात अक्तूबर तक कार्रवाई का समय दिया है। इसके बाद विभाग के मुख्यालय में धरना शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
रविवार को बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में फेडरेशन के चेयरमैन विजय पाल नाग और मुनीर अख्तर लाली ने कहा कि प्रदेश के जलाशयों में मछली पकड़कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले हजारों मछुआरे मौजूदा व्यवस्था से परेशान हैं। उनका आरोप है कि कुछ ठेकेदार स्थानीय मछुआरों से मछली खरीदने के बजाय पंजाब, चंडीगढ़, लुधियाना, दिल्ली और जम्मू समेत अन्य राज्यों से मछली मंगवा रहे हैं। इसके बाद इसे कम कीमत पर बाजार में बेचा जा रहा है।फेडरेशन पदाधिकारियों के अनुसार, बाहरी मछली की आमद बढ़ने से स्थानीय स्तर पर पकड़ी जाने वाली मछली की मांग प्रभावित हुई है। इसका सीधा नुकसान उन परिवारों को हो रहा है जिनकी आय पूरी तरह मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है। उन्होंने सरकार से स्थानीय मछुआरों के हितों को प्राथमिकता देने और उनकी पकड़ी गई मछली की खरीद सुनिश्चित करने की मांग उठाई।फेडरेशन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बाहरी राज्यों से आने वाली मछली की नीलामी और बिक्री प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। साथ ही प्रदेश की सीमाओं पर बाहरी मछली की आवाजाही पर निगरानी और जांच की प्रभावी व्यवस्था बनाने की अपील की गई है।पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सात अक्तूबर तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो मछुआरों के प्रतिनिधियों के साथ मत्स्य विभाग के मुख्यालय में धरना दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।