summer express,मोहाली | थाईलैंड से वर्ष 2023 में डिपोर्ट किए गए हरियाणा के गैंगस्टर वीरेंद्र प्रताप उर्फ काला राणा को मोहाली अदालत से राहत नहीं मिली। हथियार बरामदगी और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और जमानत याचिका में पुराने मामलों की जानकारी कथित तौर पर छिपाने को जमानत न देने के प्रमुख आधारों में शामिल किया।
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत के समक्ष काला राणा के आपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज पेश किए। सरकारी वकील के मुताबिक, आरोपी ने जमानत याचिका दाखिल करते समय अपने खिलाफ दर्ज 27 आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं किया था। बचाव पक्ष की ओर से बाद में रिकॉर्ड पेश करने की अनुमति मांगी गई, लेकिन अदालत ने यह अर्जी भी खारिज कर दी।
मामला अक्टूबर 2023 का है। पंजाब पुलिस को सूचना मिली थी कि अजय नाम का युवक मोहाली के ग्रीन एन्क्लेव के पास अवैध हथियारों के साथ किसी आपराधिक वारदात की तैयारी कर रहा है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके कब्जे से .32 बोर की दो देसी पिस्तौल और आठ कारतूस बरामद किए थे।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अजय ने जग्गू भगवानपुरिया और अमृत बल से संपर्क होने की जानकारी दी थी। उसने कथित तौर पर बताया कि उसे आपराधिक वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार उपलब्ध कराए गए थे। पूछताछ में उसने यह भी बताया कि वर्ष 2021 में दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान उसकी मुलाकात केसर सिंह से हुई थी। पुलिस के मुताबिक, केसर सिंह काला राणा का करीबी था और व्हाट्सऐप के जरिए उसके संपर्क में रहता था।
पुलिस का दावा है कि केसर सिंह ने अजय को काला राणा से संपर्क कराने और हथियार उपलब्ध कराने की बात कही थी। इसके बाद उसे एक पिस्तौल, पांच कारतूस और 30 हजार रुपये दिए गए। अजय से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 11 अक्टूबर 2023 को केसर सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत काला राणा को भी मामले में आरोपी बनाया गया। उस समय काला राणा अन्य मामलों में जेल में बंद था।
बचाव पक्ष ने जमानत के लिए दलील दी कि काला राणा करीब तीन साल से जेल में है और अभी तक मामले में ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। वकील ने कहा कि आरोपी को समय पर सुनवाई का अधिकार है और लंबे समय तक बिना ट्रायल जेल में रखना उचित नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा बताए गए पुराने मामलों में से कई में काला राणा बरी हो चुका है या उसकी सजा पर रोक लगी हुई है।
वहीं, अतिरिक्त सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ 27 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसने जमानत याचिका में इस जानकारी को छिपाया। सरकारी पक्ष ने जसवंत सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब मामले का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड छिपाना जमानत खारिज करने का आधार हो सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने वीरेंद्र प्रताप उर्फ काला राणा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही इस मामले में उसे फिलहाल जेल से राहत नहीं मिल सकी।