Summer express, अंबाला, अंकुर कपूर। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। लोग त्योहार की तैयारियों के लिए खरीदारी करने बाजार पहुंच रहे हैं। इससे दुकानदारों के चेहरों पर भी खुशी दिखाई देने लगी है। दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कुम्हार भी त्योहार की तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि महंगाई और मांग में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन पुश्तैनी काम से जुड़े कारीगर आज भी अपनी परंपरा को कायम रखे हुए हैं।
अंबाला के बाजारों में सांझी माता और मिट्टी के दीयों की खरीदारी शुरू हो गई है। दुकानदारों को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में ग्राहकों की संख्या और बढ़ेगी। कारीगरों के अनुसार, छोटे दीयों के दाम पिछले साल के आसपास ही हैं, जबकि बड़े दीयों की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। पहले 10 से 15 रुपये में मिलने वाले बड़े दीये अब 20 रुपये तक बिक रहे हैं।
अंबाला में अपने दादा खुशी राम प्रजापत के साथ दुकान संभालने वाली कोमल ने बताया कि वह पिछले 15 साल से इस काम से जुड़ी हैं, जबकि उनके दादा करीब 40 साल से मिट्टी के दीये बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। परिवार खुद मिट्टी के दीये तैयार करता है। इसके अलावा बाजार से फैंसी दीये लाकर उन पर आकर्षक रंगों और डिजाइनों से सजावट भी की जाती है। उनका कहना है कि त्योहार के शुरुआती दिनों में ग्राहक पहुंचने लगे हैं और आने वाले दिनों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
अंबाला शहर के पारंपरिक कारीगर नरेश कुमार प्रजापत ने बताया कि उन्हें मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के काम में 30 साल से अधिक का अनुभव है। उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़ी रही हैं। हालांकि, बढ़ती महंगाई ने इस काम की लागत बढ़ा दी है। पहले मिट्टी की ट्राली करीब 6,000 रुपये में मिल जाती थी, लेकिन अब इसके लिए 8,000 से 9,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दीये पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली गोबर की पाथियों की कीमत भी 10 से 15 रुपये तक पहुंच गई है। मिट्टी खरीदने से लेकर दीये तैयार करने और पकाने तक की प्रक्रिया कारीगरों को खुद संभालनी पड़ती है, जिससे खर्च लगातार बढ़ रहा है।
कारीगरों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद कई ग्राहक दीयों के उचित दाम देने में हिचकिचाते हैं। इससे उनकी कमाई प्रभावित होती है। इसके बावजूद वे हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के लिए दीये तैयार कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि त्योहार के दौरान बिक्री अच्छी रहेगी।
वहीं, बाजार में खरीदारी करने पहुंच रहे लोगों का कहना है कि इस बार कई चीजों के दाम बढ़े हैं, लेकिन दिवाली की तैयारियों में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। कई ग्राहक मिट्टी के दीये जलाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली पर पारंपरिक मिट्टी के दीये जलाने से त्योहार की रौनक और परंपरा दोनों बनी रहती हैं।