Summer express, बलिंदर कुमार, कैथल। हरियाणा में लगातार खराब मौसम और बारिश ने धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रविवार को कैथल में हुई तेज बारिश के कारण अनाज मंडियों में खुले में रखा हजारों क्विंटल धान भीग गया। मंडियों में जलभराव होने से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। बारिश के बाद धान में नमी बढ़ने से किसानों को उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने और फसल का उचित भाव नहीं मिलने की चिंता सता रही है।
कैथल शहर की अनाज मंडियों में बारिश के कारण हालात बिगड़ गए हैं। खुले में रखी धान की फसल और बोरियों में भरा अनाज भीग गया। कई स्थानों पर धान की बोरियों के नीचे पानी जमा हो गया, जिससे फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। मंडियों में अपनी उपज लेकर पहुंचे किसानों ने खरीद प्रक्रिया में देरी और फसल का उठान नहीं होने पर नाराजगी जताई।
किसानों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से मंडियों में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद एजेंसियां समय पर उनकी फसल नहीं खरीद रही हैं। जिन किसानों की धान की खरीद हो चुकी है, उनकी उपज का भी समय पर उठान नहीं किया जा रहा। इसके चलते मंडियों में धान की बोरियों के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं और किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
कैथल शहर की तीनों अनाज मंडियों में धान का उठान धीमा होने के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। मंडियों के अंदर के रास्तों से लेकर बाहर की सड़कों तक धान की बोरियां जमा हैं। इससे आवागमन प्रभावित होने के साथ-साथ फसल के रखरखाव में भी परेशानी आ रही है। रविवार को हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। खुले में रखी उपज भीगने से अब उन्हें आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
किसानों को मंडियों के साथ-साथ खेतों में भी मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। मंडियों में पहुंचने के बाद फसल की खरीद और उठान में देरी हो रही है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल पर भी खराब मौसम का खतरा बना हुआ है। किसानों को आशंका है कि लगातार बारिश और नमी के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर बिक्री और मिलने वाले भाव पर पड़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन और संबंधित खरीद एजेंसियों से मांग की है कि धान की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और खरीदी गई फसल का जल्द उठान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही मंडियों में जलभराव की समस्या दूर करने और खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके।