आयोग की रिपोर्ट के बाद ही नए जिलों पर फैसला, 6 महीने तक लग सकता है समय: हर्षवर्धन चौहान
शिमला/ संजू -:हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। सुक्खू सरकार ने नए जिले बनाने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए आयोग का गठन किया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही नए जिले बनाने पर फैसला लिया जाएगा। सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में गठित आयोग प्रदेश की प्रशासनिक जरूरतों का आकलन करेगा। मंत्री के मुताबिक, आयोग को रिपोर्ट सौंपने में चार से छह महीने तक का समय लग सकता है।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय भी नए जिले बनाने की कवायद हुई थी। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने नूरपुर, पालमपुर और सुंदरनगर में अतिरिक्त उपायुक्तों की तैनाती की थी। उन्होंने कहा कि कांगड़ा में 15 और मंडी में 10 विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में लोगों की प्रशासनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नए जिले बनाने की संभावनाओं पर विचार करना जरूरी है। भाजपा नेता सुधीर शर्मा के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाया। प्रदेश में खनन गतिविधियों को व्यवस्थित करने और राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार अलग खनन निदेशालय बनाने जा रही है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि मंत्रिमंडल ने इसके गठन को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में करीब 450 क्रशर हैं, जिनमें से लगभग 100 बंद रहते हैं, जबकि 300 से 350 क्रशर संचालित हो रहे हैं। मंत्री के मुताबिक, प्रदेश के विकास के लिए खनन जरूरी है और सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ प्रक्रिया की खामियों को दूर करना है। उन्होंने हरियाणा के यमुनानगर जिले में 350 क्रशर होने का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल में खनन को लेकर विरोध को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। साथ ही, उन्होंने वन अधिकार अधिनियम के चलते खनन क्षेत्र से अपेक्षित राजस्व हासिल करने में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया।
वहीं, प्रदेश की नई उद्योग नीति को लेकर भी उद्योग मंत्री ने बड़ा अपडेट दिया है। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि नई उद्योग नीति तैयार हो चुकी है और इसे अगली मंत्रिमंडल बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। प्रदेश में उद्योगों के आने और बंद होने को लेकर भाजपा की आलोचना पर उन्होंने कहा कि उद्योगों का खुलना और बंद होना सामान्य प्रक्रिया है। अलग-अलग राज्यों की नीतियों और परिस्थितियों के आधार पर उद्योगों का स्थानांतरण होता रहता है। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे पर भी राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाया।