Summer express, गुरुग्राम (अनुज पंचाल)। अंतरिक्ष में लगातार बढ़ रहे कचरे और पुराने हो चुके उपग्रहों से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए गुरुग्राम स्थित सैमटेल एवियोनिक्स लिमिटेड ने अहम पहल की है। कंपनी ने जापान की स्पेस-टेक कंपनी बुल (Bull) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत भारत और जापान मिलकर अंतरिक्ष से मलबा हटाने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित करेंगे। इससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित बनाने और अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे से होने वाली संभावित टक्करों के खतरे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसकी जानकारी सैमटेल एवियोनिक्स के सीईओ पुनीत कौड़ा ने दी।
पुनीत कौड़ा के अनुसार, अंतरिक्ष में पुराने रॉकेटों के टुकड़े और निष्क्रिय उपग्रह बड़ी मात्रा में जमा हो रहे हैं। यह मलबा सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों से टकराकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी टक्करों से अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा प्रभावित होने के साथ-साथ मलबे की मात्रा और बढ़ने का खतरा भी रहता है। इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों कंपनियां सक्रिय और निष्क्रिय, दो तरह के समाधानों पर काम करेंगी।
सक्रिय समाधान के तहत अंतरिक्ष यान में रोबोटिक आर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी मदद से अंतरिक्ष में मौजूद बेकार वस्तुओं और मलबे को पकड़कर हटाने की दिशा में काम होगा। वहीं, निष्क्रिय तकनीक में विशेष गुब्बारे जैसी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जो मिशन पूरा होने के बाद सक्रिय होकर उपकरण को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाने और नष्ट करने की प्रक्रिया में मदद करेगी। इससे मिशन समाप्त होने के बाद अंतरिक्ष में बेकार उपकरणों के लंबे समय तक बने रहने की समस्या कम करने का लक्ष्य है।
जापानी स्टार्टअप बुल के सीईओ और संस्थापक यासु तो ने भी इस साझेदारी को भविष्य की अंतरिक्ष चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने बताया कि कंपनी की तकनीक में 10 वर्ग मीटर की बड़ी झिल्ली का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में मलबे की समस्या को नियंत्रित करने और अंतरिक्ष यानों की सुरक्षा से जुड़े समाधानों को विकसित करना है। उन्होंने भारत और जापान के बीच तकनीकी सहयोग को दोनों देशों के लिए उपयोगी बताया।
पुनीत कौड़ा ने कहा कि भारत अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। सैमटेल एवियोनिक्स पहले से ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), थल सेना और वायु सेना के लिए उन्नत एवियोनिक्स उपकरण तैयार कर रही है। कंपनी आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि नए अंतरिक्ष प्रोजेक्ट को लेकर जल्द ही केंद्र सरकार के सामने प्रस्ताव रखा जाएगा। परियोजना के लिए सरकारी सहयोग और वित्तीय सहायता मिलने पर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए उन्नत भारत-जापान तकनीक विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। इस साझेदारी को अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने, अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा बढ़ाने और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।