Summer express, राकेश कुमार शर्मा, करनाल। हरियाणा के करनाल में धान की सरकारी खरीद में देरी और मंडियों में फसल के कम दाम मिलने के विरोध में किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा और हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने सेक्टर-9 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारी किसान अटल पार्क से नारेबाजी करते हुए भाजपा कार्यालय पहुंचे और धान खरीद व्यवस्था में सुधार करने के साथ फसल का उचित मूल्य दिलाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिसकर्मियों ने किसानों से पुतला छीनने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। किसानों ने पुतला नहीं छोड़ा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। किसानों का कहना है कि धान की खरीद में देरी और फसल के कम दाम मिलने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि धान खरीद का सीजन चलने के बावजूद मंडियों में सरकारी खरीद की व्यवस्था सुचारु रूप से नहीं चल रही है। उनके मुताबिक, किसानों को धान के लिए 1900 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं, जबकि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। किसानों का दावा है कि इस अंतर के कारण उन्हें प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात में किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने हाल में हुई बारिश और मंडियों में जलभराव से पैदा हुई समस्याओं का मुद्दा भी उठाया। किसानों के अनुसार, बारिश के कारण धान में नमी बढ़ गई और कई जगह फसल भीगने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार से नमी के निर्धारित मानकों में जरूरी छूट देने, मंडियों में जल निकासी और अन्य व्यवस्थाएं बेहतर करने तथा धान की खरीद और उठान में तेजी लाने की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि खरीद प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को जल्द दूर किया जाए और किसानों को एमएसपी के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, बारिश से प्रभावित फसल की खरीद में व्यावहारिक राहत देने की भी मांग की गई।
प्रदर्शन में किसान नेता सुरेन्द्र सांगवान, मौलख सिंह और बहादुर सिंह मेहला सहित अन्य किसान शामिल रहे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।