Summer express, डेनपासार (इंडोनेशिया)। इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने से पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। मोटरसाइकिल और कारों की लाइनें कई जगह सड़कों तक पहुंच गईं, जिससे स्थानीय लोगों और कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन पर निर्भर इस द्वीप पर ईंधन की मांग अचानक बढ़ने, तकनीकी खराबी और खराब मौसम के कारण वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाली में ईंधन की किल्लत का मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट या ईंधन के कुल भंडार में कमी नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आपूर्ति और वितरण में आई बाधाएं हैं। इंडोनेशिया के ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्रालय के तेल और गैस विभाग के महानिदेशक लाओडे सुलेमान के मुताबिक, एक ईंधन टैंकर के पहुंचने में देरी हुई थी, लेकिन अब वह पहुंच चुका है और ईंधन की आपूर्ति 24 घंटे जारी है।
सुलेमान ने बताया कि बाली पहुंचने वाले एक टैंकर में ईंधन उतारने की तैयारी के दौरान तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके कारण द्वीप के प्रमुख ईंधन टर्मिनलों तक आपूर्ति पहुंचने में विलंब हुआ। इसके अलावा समुद्र में ऊंची लहरों और खराब मौसम के चलते डेनपासार के सांगगरन टर्मिनल तथा पूर्वी बाली के मांगगिस टर्मिनल पर भी ईंधन की खेप पहुंचने में देरी हुई।
हालांकि, ईंधन की कमी की समस्या केवल बाली तक सीमित नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया के 11 प्रांतों में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। पश्चिमी सुमात्रा में वाहन चालकों को ईंधन भरवाने के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वहीं, बैंटन प्रांत में मेराक-तंगेरांग राजमार्ग पर डीजल लेने के लिए वाहनों की कतार करीब एक किलोमीटर तक लंबी हो गई। आचे, रियाउ, पश्चिमी कालीमंतन, दक्षिणी सुलावेसी, उत्तरी सुलावेसी और योग्याकार्ता के कुछ क्षेत्रों में डीजल या पर्टालाइट पेट्रोल की उपलब्धता पूरी तरह बाधित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
इंडोनेशिया में ईंधन की आपूर्ति को लेकर चुनौतियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीदना भी मुश्किल हो रहा है। तेल और गैस विभाग के महानिदेशक के अनुसार, ईंधन आपूर्ति के लिए निकाली जा रही निविदाओं में अब कम कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त भंडार रखने वाले देशों से सीधे ईंधन खरीदना पड़ रहा है, जिसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इंडोनेशिया के ईंधन आयात के लगभग 25 प्रतिशत स्रोत प्रभावित हुए हैं।
ईंधन की कमी की आशंका के बीच सरकारी सब्सिडी वाले पर्टालाइट पेट्रोल की मांग में भी तेजी आई है। यह पेट्रोल बिना सब्सिडी वाले ईंधन की तुलना में सस्ता है। आपूर्ति खत्म होने के डर से वाहन चालकों ने जरूरत से अधिक ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे कई पेट्रोल पंपों पर दबाव और बढ़ गया। कुछ स्टेशनों पर ईंधन उपलब्ध नहीं होने के बोर्ड लगा दिए गए, जबकि वाहन चालक नई खेप पहुंचने का इंतजार करते रहे।
इस स्थिति का असर बाली के आम नागरिकों के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। द्वीप पर लोगों की आवाजाही, पर्यटकों के परिवहन और दैनिक गतिविधियों के लिए ईंधन बेहद जरूरी है। इसी बीच, बाली सरकार सब्सिडी वाले ईंधन की बिक्री को सबसे अधिक आय वाले 10 प्रतिशत लोगों तक सीमित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, ताकि सब्सिडी का लाभ जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।
बाली के गवर्नर आई वायन कोस्टर के अनुसार, भंडारण डिपो में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन टैंकरों के देर से पहुंचने और सड़कों पर यातायात जाम के कारण पेट्रोल पंपों तक आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने लोगों से घबराकर ईंधन की खरीदारी नहीं करने की अपील की और बताया कि द्वीप के विभिन्न हिस्सों में अतिरिक्त ईंधन भेजा जा रहा है।
इंडोनेशिया की सरकारी ऊर्जा कंपनी पर्टामिना ने भी कहा है कि वह ईंधन की आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है। कंपनी के अनुसार, हाल ही में पहुंचे एक टैंकर में 1.8 करोड़ लीटर सब्सिडी वाला पर्टालाइट पेट्रोल और 25 लाख लीटर पर्टामैक्स पेट्रोल था। पर्टामैक्स उच्च ऑक्टेन वाला गैर-सब्सिडी ईंधन है। अधिकारियों को उम्मीद है कि अतिरिक्त खेप पहुंचने और वितरण व्यवस्था में सुधार होने से पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों की समस्या कम होगी।