Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:कांगड़ा जिले की पोंग झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए नई पहल की गई है। इस दिशा में पोंग बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी और पर्यटन विभाग की ओर से गठित जिला स्तरीय वाटर स्पोर्ट्स एंड एलाइड एक्टिविटी सोसाइटी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य झील में पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विकसित करना और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना है।
पोंग झील वन्यजीव अभयारण्य और रामसर साइट के रूप में विशेष पहचान रखती है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ऐसे में संबंधित विभागों ने संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पर्यटन गतिविधियों की संभावनाएं तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
क्षेत्रवार तैयार होगी पर्यटन विकास योजना
जिला कांगड़ा पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने बताया कि पोंग झील और इससे संबंधित संरक्षण क्षेत्रों की प्रबंधन योजनाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत यह निर्धारित किया जाएगा कि झील के किन हिस्सों में किस तरह की पर्यटन गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारी जल्द ही क्षेत्र का दौरा करेंगे और स्थानीय हितधारकों से चर्चा कर संभावित गतिविधियों की पहचान करेंगे।उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के दौरान शोर और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए ऐसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटकों को झील की विशेषताओं से परिचित करा सकें।
बर्ड वॉचिंग और स्थानीय गाइडों पर रहेगा फोकस
पोंग झील में हर वर्ष लगभग चार महीने तक पक्षियों को देखने का प्रमुख सीजन रहता है। इस दौरान देश-विदेश से पक्षी विशेषज्ञ, ऑर्निथोलॉजिस्ट और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर गाइड के रूप में तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को विभिन्न पक्षी प्रजातियों, उनके प्राकृतिक आवास और संरक्षण प्रयासों के बारे में जानकारी दे सकेंगे। इससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ स्थानीय युवाओं और लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। विभाग का प्रयास है कि बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यटन और संरक्षण को एक-दूसरे का पूरक बनाया जाए।
क्रूज और हाउसबोट की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी
विनय धीमान के अनुसार, पोंग झील के कुछ गहरे जल क्षेत्रों में क्रूज और हाउसबोट जैसी गतिविधियों की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, इन्हें शुरू करने से पहले पर्यावरणीय संवेदनशीलता, जैव विविधता और वन्यजीवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया जाएगा। सभी आवश्यक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही आगे की योजना बनाई जाएगी।
पर्यटन विभाग का लक्ष्य पोंग झील को आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि पर्यटन गतिविधियों से प्रवासी पक्षियों, प्राकृतिक आवासों और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। एमओयू के माध्यम से पर्यटन विकास और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।