Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:भाजपा अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मन्ना लाल रावत ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जनजातीय समुदायों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा। विशेष रूप से जिला कांगड़ा में गद्दी समुदाय की छह उपजातियों को गद्दी शब्द के साथ जोड़ने की मांग को भाजपा उच्च स्तर पर उठाएगी। बुधवार सुबह कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की जनजातीय विकास नीतियों और भाजपा की भावी रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की।
डॉ. रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की ओर से योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए सेचुरेशन अप्रोच अपनाई जा रही है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय नायकों का सम्मान करते हुए विकास को गति देना भाजपा की प्राथमिकता है।उन्होंने बताया कि शाहपुर में आयोजित होने वाली एसटी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में जनजातीय क्षेत्रों की समस्याओं, केंद्र सरकार की योजनाओं और आगामी जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन को लेकर चर्चा की जाएगी। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित होने वाले जनजातीय गौरव दिवस के दौरान स्थानीय जनजातीय नायकों, पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और विरासत को प्रमुखता देने पर भी विचार किया जाएगा। उनका कहना था कि विकास के साथ समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और अस्मिता को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
डॉ. रावत ने कहा कि अटल टनल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से हिमाचल प्रदेश में विकास तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। भाजपा का प्रयास है कि जनजातीय समुदायों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
गद्दी समुदाय की छह उपजातियों का मामला बैठक में उठेगा
गद्दी समुदाय की छह उपजातियों को गद्दी पहचान के साथ जोड़ने की लंबित मांग पर डॉ. रावत ने कहा कि इस विषय को एसटी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि लंबे समय से लंबित इस मांग पर सकारात्मक चर्चा हो सके।उन्होंने उत्तराखंड में एक बड़े समुदाय को जनजातीय पहचान से जोड़ने के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी जनजातीय समाज और पहाड़ी जीवनशैली से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा का दृष्टिकोण ऐसे मुद्दों के समाधान की दिशा में पहल करना है, जिन्हें लंबे समय से अपेक्षित ध्यान नहीं मिला है।
रोजगार और पलायन के मुद्दों पर भी होगी चर्चा
डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से हिमाचल प्रदेश में जनजातीय समुदायों से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं। इनमें रोजगार, सरकारी कर्मचारियों की समस्याएं और पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा कर जनजातीय क्षेत्रों के विकास और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे की रणनीति बनाई जाएगी।उन्होंने कहा कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा के अनुरूप जनजातीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रयासरत है।