Summer express, अंबाला (अंकुर कपूर)। बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर महिलाएं 1 नवंबर को अहोई माता का व्रत रखेंगी। व्रत को लेकर अंबाला के बाजारों में खरीदारी शुरू हो गई है। महिलाएं गन्ने, सिंघाड़े और पूजा से जुड़ी अन्य सामग्री की खरीदारी कर रही हैं। बाजारों में गन्ने के ढेर भी दिखाई देने लगे हैं, जिन्हें महिलाएं व्रत की पूजा के लिए घर ले जा रही हैं।
अहोई माता का व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यह व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। इसे करवा चौथ की तरह निर्जला रखने की परंपरा है। महिलाएं सुबह सरगी के बाद दिनभर अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं तथा शाम को आसमान में तारे दिखाई देने के बाद पूजा करके व्रत खोलती हैं। हालांकि कुछ महिलाएं कथा के बाद फलाहार भी करती हैं।
बाजार में खरीदारी करने पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे अपने बच्चों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर साल यह व्रत रखती हैं। उन्होंने कहा कि करवा चौथ की तरह अहोई माता के व्रत में भी दिनभर उपवास रखा जाता है, लेकिन करवा चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद खोला जाता है, जबकि अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। पूजा में गन्ने और सिंघाड़े का विशेष महत्व होता है। इसके साथ मिठाई और अन्य पूजन सामग्री भी रखी जाती है।
सुयोगिनी ज्योतिष, अंबाला के पंडित अशोक प्रजापति ने बताया कि अहोई माता के व्रत से जुड़ी कथा का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। उन्होंने व्रत की धार्मिक मान्यताओं और इससे जुड़ी कथा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिलाएं सुबह तारों की छांव में उठकर भोजन करती हैं और इसके बाद व्रत का संकल्प लेती हैं। कुछ महिलाएं दोपहर में कथा के बाद फलाहार करती हैं, जबकि अधिकांश महिलाएं रात को तारों के दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं।
अहोई अष्टमी को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल से त्योहार की तैयारियां भी नजर आने लगी हैं। महिलाएं पूजा की सामग्री जुटाने में लगी हैं और रविवार को व्रत रखकर संतान की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।