Summer express, पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों से करीब 504 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा को अदालत से राहत नहीं मिली है। सीबीआई की विशेष अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपी की कथित भूमिका और जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
सीबीआई की जांच के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपये की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एक निजी बैंक में जमा थी। बैंक खातों और सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में अनियमितताएं सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी। बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी खातों से करीब 504 करोड़ रुपये निकालकर फर्जी कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक, चंडीगढ़ के सेक्टर-36डी निवासी विक्रम वधवा इस मामले के मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाता था। उस पर सरकारी अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने, बैंक खातों के माध्यम से धनराशि स्थानांतरित करवाने और कथित घोटाले की रकम को ठिकाने लगाने में मदद करने का आरोप है।
सीबीआई का दावा है कि विक्रम वधवा को कथित तौर पर कुल 37.82 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 4.57 करोड़ रुपये नकद और करीब 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में प्राप्त हुए। जांच में यह भी सामने आया कि उसने पांच अचल संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
जांच के दौरान विक्रम वधवा और मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के बीच संपर्क के भी कई साक्ष्य मिले हैं। सीबीआई के अनुसार, जून 2024 से जनवरी 2026 के बीच दोनों के बीच 132 बार फोन पर बातचीत हुई थी। इसके अलावा एक अन्य आरोपी के मोबाइल फोन में मिले नोट में भी विक्रम का नाम और रकम का उल्लेख पाया गया था।
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि विक्रम वधवा का बैंक या सरकारी विभागों से कोई सीधा संबंध नहीं था। उसके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन सामान्य कारोबारी गतिविधियों का हिस्सा थे और उन्हें घोटाले से जोड़ना उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। मामले में आरोपी की कथित भूमिका, बड़ी रकम के लेनदेन और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले से 504 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन घोटाले में आरोपी विक्रम वधवा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।