Shimla, Sanju
हिमाचल प्रदेश में बेदखली के मुद्दे पर बागवानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को राज्य कैबिनेट बैठक के दूसरे दिन हिमाचल किसान सभा और सेब उत्पादक संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान-बागवानों ने राज्य सचिवालय का घेराव किया।
प्रदर्शनकारी टोलेंड से रैली के रूप में निकले और छोटा शिमला सचिवालय तक पहुंचे, जहां पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश में हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमित वन भूमि से सेब के पौधों को हटाने का आदेश था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कटान पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद किसानों की चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं।प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक राकेश सिंघा और बागवान नेता संजय चौहान ने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
राकेश सिंघा ने कहा कि यह सरकार अपंग है। सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली को पहले भी गैरकानूनी बताया, लेकिन सरकार ठोस कदम उठाने में नाकाम रही। अब अगर सरकार नहीं चेती तो जेलों में जगह कम पड़ जाएगी। जैसे कृषि कानून वापस कराए गए, वैसे ही हम भी अपनी जमीन के लिए लड़ेंगे।”
वहीं, संजय चौहान ने अधिकारियों पर हमला बोलते हुए कहा, सरकार पर अफसरशाही हावी है। कोर्ट के आदेश की आड़ में बागवानों की मेहनत को बर्बाद किया गया, लोगों को उनकी ज़मीन से जबरन बेदखल किया जा रहा है। हम ये अन्याय नहीं सहेंगे।
राकेश सिंघा, किसान-बागवान नेता एवं पूर्व विधायक, ठियोग…अब हमारा सवाल है – क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करेगी? अगर नहीं, तो आंदोलन और तेज़ होगा।”
संजय चौहान, बागवान नेता..मुख्य सचिव और वन विभाग के अधिकारी बेलगाम हैं। सरकार को इन पर लगाम कसनी होगी, नहीं तो परिणाम भुगतने को तैयार रहे।