गुड़गांव | गुड़गांव में गुरुवार सुबह अचानक इमरजेंसी अलार्म बज उठा। भूकंप और केमिकल लीक की अफवाहों के साथ पांच अलग-अलग लोकेशनों पर लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना मिली। राहत-बचाव दल सक्रिय हुआ, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, दर्जनों घायल और कुछ की ‘मौत’ भी दर्ज की गई — लेकिन यह सब एक अभ्यास था।
दरअसल, जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन क्षमता को परखने के लिए ‘सुरक्षा चक्र’ नाम से मॉक ड्रिल आयोजित की गई। भूकंप और रसायनिक रिसाव को थीम बनाकर इस मॉक ड्रिल में गुरुग्राम समेत 5 जिलों को शामिल किया गया था। गुरुग्राम में कुल 5 स्पॉट चिन्हित किए गए, जहां पर प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और एनडीआरएफ जैसी एजेंसियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया।
मुख्य असेंबली पॉइंट ताऊ देवीलाल स्टेडियम बनाया गया था, जहां से पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की गई। सीटीएम सपना यादव ने मॉक ड्रिल की अगुवाई की। इस दौरान जिला प्रशिक्षण अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर कमियों को भी नोट किया, ताकि भविष्य की तैयारियों में इन्हें सुधारा जा सके।
ड्रिल के दौरान फर्जी घायलों को मौके पर फर्स्ट एड दिया गया और फिर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। इस पूरे अभ्यास का मकसद था कि आपदा के समय सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ तत्काल राहत व बचाव कार्य किया जा सके।
रिपोर्ट अब संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है, जिनके आधार पर विभागों को जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यासों से न सिर्फ प्रशासनिक टीमें सजग होती हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी जागरूकता और समझ बढ़ती है।